नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को होलिका दहन किया जाता है। इस वर्ष 13 मार्च को होलिका दहन होगा। इस दौरान होलिका और प्रहलाद की मूर्ति रखकर पूजा की जाती है और होलिका दहन की अग्नि में नारियल, अक्षत, बताशे, उपले, गुलाल, पीली सरसों आदि अर्पित करने का विधान है, जिससे घर में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं दूसरी ओर एक मान्यता के अनुसार कुछ लोगों को होलिका दहन देखने की मनाही है। जानिए इसका क्या है कारण
हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार कुछ लोगों को होलिका दहन नहीं देखने दिया जाता। माना जाता है कि यदि वे लोग जलती हुई होली देख लेते हैं तो उन्हें और उनके परिवार को मुसीबतें घेर लेती हैं, उनके हंसते-खेलते परिवार की खुशियों पर ग्रहण लग जाता है। इसके अलावा उनकी सेहत पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। जानिए ये नियम किन लोगों पर लागू होते हैं।
नवविवाहित महिलाएं
जिन लोगों की नई-नई शादी हुई है उन नवविवाहित महिलाओं को होलिका दहन देखने की इजाजत नहीं दी जाती, उन्हें होलिका की पूजा में भी शामिल नहीं किया जाता। होलाष्टक लगने से पहले ही नवविवाहिता अपने मायके चली जाती है और पहली होली का त्योहार अपने मायके में रहकर ही मनाती है। ससुराल में रहते हुए यदि होलिका दहन देखती हैं तो यह दांपत्य जीवन पर अशुभ असर डालता है, इसलिए नवविवाहिताएं पहली होली मायके में मनाती हैं।
गर्भवती महिलाएं
गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन और उसकी पूजा से दूर रहना चाहिए, क्योंकि मान्यता के अनुसार इससे उनके होने वाले बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे की सेहत पर भी बुरा असर हो सकता है। वहीं बच्चे के भविष्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।
नवजात बच्चे
नवजात बच्चों को भी होलिका दहन में शामिल होने की मनाही होती है, उन्हें होलिका दहन के आसपास ले जाने की मनाही होती है। क्योंकि होलिका दहन में लोग अपनी नकारात्मकता की आहुति देते हैं। ऐसे में बच्चों पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है
सास-बहू एक साथ न देखें
सास बहू दोनों को एक साथ होलिका दहन स्थल के पास नहीं जाना चाहिए। यदि दोनों को ही अग्नि की पूजा करना है तो अलग-अलग समय पर जाकर कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि यदि सास-बहू दोनों साथ में जाकर पूजा करती हैं तो उनके रिश्तों में खटास आ सकती है।
इकलौती संतान
मान्यता के अनुसार इकलौती संतान के साथ होलिका दहन देखना शुभ नहीं होता। ऐसे माता-पिता को अपनी संतान के साथ होलिका दहन की अग्नि देखने से बचना चाहिए। यदि होलिका का पूजन करना है तो घर के किसी बड़े बुजुर्ग कर सकते हैं।





