नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सावन की शुरुवात आज 11 जुलाई शुक्रवार से हो रहा है। जहां इस वर्ष अत्यंत शुभ संयोगों के साथ प्रीति योग और आयुष्मान योग बन रहे हैं, जो सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाले माने जाते हैं। सावन मास 11 जुलाई से 9 अगस्त तक रहेगा। जानें आराधना करने की विधि।
बता दे, सावन मास 11 जुलाई से 9 अगस्त तक रहेगा। जो इस बार श्रद्धालु भक्तों को चार सावन सोमवार का अवसर प्राप्त होगा। वहीं 9 अगस्त को सावन पूर्णिमा के साथ-साथ रक्षाबंधन का त्योहार भी मनाया जाएगा। सावन की शुरुआत इस वर्ष अत्यंत शुभ संयोगों के साथ होगी। पहले दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग और आयुष्मान योग बन रहे है जाने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए क्या अर्पित करें ।
इन फूलों से करें भोलेनाथ की अराधना
वाहन सुख के लिए भगवान भोलेनाथ को चमेली के फूल को चढ़ाना चाहिए।
भगवान भोलेनाथ को सुंदर वस्त्रों की प्राप्ति के लिए कनेर के फूल चढ़ाना चाहिए।
भगवान भोलेनाथ को पुत्र कामना के लिए लाल धतूरा चढ़ाना चाहिए।
भगवान भोलेनाथ को अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए दूर्वा चढ़ाना चाहिए।
भगवान भोलेनाथ को आर्थिक लाभ के लिए कमल, शंखपुष्प व बेलपत्र चढ़ाना चाहिए।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, सनातन परंपरा के अनुसार तिथि की गणना उदया तिथि के आधार पर की जाती है। सावन मास की शुरुआत 10 जुलाई की मध्यरात्रि 1:48 बजे से लग रही है। इसलिए इसका आरंभ 11 जुलाई को होगा। महादेव को सावन महीना अत्यंत प्रिय है। मान्यता है कि इस माह में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। पूरे महीने शिवालयों में भक्तों का सैलाब उमड़ता है, विशेषकर सोमवार के दिन, जब भक्त उपवास रखते हैं और दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा आदि से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं।
ज्योतिषाचार्य आचार्य के अनुसार, सावन सोमवार का व्रत रखने से भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं। इस बार का पहला सोमवार अत्यंत शुभ है क्योंकि उस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, जो सभी कार्यों में सफलता दिलाता है। प्रीति योग प्रेम और संबंधों को मजबूत करता है, वहीं आयुष्मान योग दीर्घायु और उत्तम स्वास्थ्य देने वाला है।
सावन माह की विशेष तिथियां तिथि-अवसर-
दिन 11 जुलाई- सावन आरंभ,
14 जुलाई-पहला सोमवार
21 जुलाई-दूसरा सोमवार
28 जुलाई-तीसरा सोमवार
4 अगस्त-चौथा व अंतिम सोमवार
9 अगस्त-सावन पूर्णिमा, रक्षाबंधन
देशभर के शिव मंदिरों में सावन में विशेष पूजन और जलाभिषेक का आयोजन होता है इस दौरान भक्त सुबह से ही जल कलश लेकर मंदिरों की ओर चल पड़ते है जहां बच्चें से लेकर बूढ़े सभी भगवान भोलेनाथ की भक्ति में तल्लीन हो जाते है।




