नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। पितृ पक्ष का समापन सर्व पितृ अमावस्या के साथ होता है, जो इस बार 21 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन मास की अमावस्या तिथि 21 सितंबर को रात 12 बजकर 16 मिनट पर आरंभ होकर 22 सितंबर को रात 1 बजकर 23 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में तिथि के उदय को मान्यता दी जाती है, इसलिए सर्व पितृ अमावस्या 21 सितंबर को ही श्रद्धालु मनाएंगे।
पितृ लोक से पितर लोक वापस लौटते हैं।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पितृ लोक से पितर लोक वापस लौटते हैं। इसलिए इस दिन पितरों के लिए अंतिम श्राद्ध और तर्पण करना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। पितृ पक्ष के दौरान की गई श्रद्धा और तर्पण से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और घर परिवार पर उनकी कृपा बनी रहती है।
तर्पण और श्राद्ध के लिए शुभ मुहूर्त
इस बार तर्पण और श्राद्ध के लिए खास मुहूर्त निम्नलिखित हैं
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:50 बजे से दोपहर 12:38 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:38 बजे से 1:27 बजे तक
दोपहर बेला: दोपहर 1:27 बजे से शाम 3:53 बजे तक
श्राद्ध और तर्पण के दौरान इन समयों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, जिससे पूजा फलदायक और शुभ हो।
पंचांग के अनुसार अन्य महत्वपूर्ण मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 से 5:22 बजे तक
सूर्योदय: सुबह 6:09 बजे
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:16 से 3:04 बजे तक
सूर्यास्त: शाम 6:19 बजे
गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:19 से 6:43 बजे तक
निशिता मुहूर्त: रात 11:50 से 12:38 बजे तक
ज्योतिषीय संयोग बन रहे हैं अत्यंत शुभ
ज्योतिषियों का कहना है कि इस वर्ष सर्व पितृ अमावस्या पर शुभ योग, शुक्ल योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और शिववास योग बन रहे हैं, जो पूर्वजों की आत्मा को शांति देने के साथ-साथ परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाले हैं। ऐसे शुभ संयोग में किए गए श्राद्ध का विशेष महत्व होता है।
इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है
पितृ अमावस्या का यह पावन दिन श्रद्धालुजन अपने पूर्वजों की याद में पिंडदान, तर्पण और दान आदि करते हैं। इससे पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और वे परिवार की रक्षा करते हैं। अतः इस दिन का विशेष महत्व है और इसे पूरी श्रद्धा और विधिपूर्वक मनाना चाहिए।





