नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। प्रयागराज की संगम नगरी एक बार फिर आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपराओं का भव्य केंद्र बनने जा रही है। महाकुंभ 2025 के ऐतिहासिक आयोजन के बाद अब योगी सरकार माघ मेला 2026 को ‘मिनी कुंभ’ के रूप में भव्य स्वरूप देने की तैयारी में जुट गई है। 3 जनवरी 2026 से संगम तट पर माघ मेले की शुरुआत होगी, जो पूरे 44 दिनों तक चलेगा। सरकार का अनुमान है कि इस दौरान 12 से 15 करोड़ श्रद्धालु संगम में पवित्र स्नान के लिए प्रयागराज पहुंच सकते हैं।
गंगा और यमुना दोनों नदियों के किनारे फैला होगा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने स्नान, सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को लेकर व्यापक इंतजाम किए हैं। संगम क्षेत्र में करीब 8 किलोमीटर लंबा अस्थायी स्नान घाट तैयार किया जा रहा है, जो गंगा और यमुना दोनों नदियों के किनारे फैला होगा। फिसलन और हादसों से बचाव के लिए सीमेंट की बोरियों में रेत भरकर घाटों का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही स्नान घाटों के आगे डीप वॉटर बैरिकेटिंग लगाई जा रही है, ताकि कोई भी श्रद्धालु अनजाने में गहरे पानी की ओर न जा सके।
माघ मेले का पहला स्नान 3 जनवरी को पड़ेगा।
मेला प्रशासन का कहना है कि इतने लंबे घाट बनने से संगम नोज पर श्रद्धालुओं का दबाव कम होगा। खास स्नान पर्वों के दौरान भीड़ को अलग-अलग घाटों की ओर डायवर्ट किया जाएगा, जिससे किसी एक स्थान पर अत्यधिक भीड़ जमा न हो और किसी भी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
माघ मेले का पहला स्नान पर्व 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के दिन पड़ेगा। इसके बाद प्रमुख स्नान पर्वों में 15 जनवरी को मकर संक्रांति, 18 जनवरी को मौनी अमावस्या, 23 जनवरी को बसंत पंचमी, 1 फरवरी को माघी पूर्णिमा और अंत में 15 फरवरी को महाशिवरात्रि का अंतिम स्नान पर्व होगा। इन्हीं के साथ माघ मेले का समापन होगा और संगम की रेती पर करीब डेढ़ महीने तक धर्म और अध्यात्म की दिव्य धारा बहती रहेगी।
‘मिनी कुंभ’ सुरक्षित आयोजन का उदाहरण भी पेश करेगा।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। माघ मेला इस बार 800 हेक्टेयर क्षेत्र में 7 सेक्टरों में आयोजित किया जाएगा। मेले की सुरक्षा के लिए करीब 10 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा 17 थाने, 42 पुलिस चौकियां और 17 फायर स्टेशन बनाए जा रहे हैं। पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखने के लिए एआई आधारित सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
कुल मिलाकर, प्रयागराज का माघ मेला 2026 न सिर्फ श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि बेहतर प्रबंधन, सुरक्षा और सुविधाओं के साथ ‘मिनी कुंभ’ के रूप में एक भव्य और सुरक्षित आयोजन का उदाहरण भी पेश करेगा।





