नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आश्विन शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे पापांकुशा एकादशी कहा जाता है, इस वर्ष आज 3 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और विशेष दान-पुण्य से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं तथा भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
जन्म-जन्मांतर के पापों से छुटकारा मिलता है
धर्मशास्त्रों में पापांकुशा एकादशी का अत्यंत महत्व बताया गया है। इसे जन्म-जन्मांतर के पापों से छुटकारा दिलाने वाली एकादशी माना गया है। इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने, विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने, तुलसी पूजन करने और जरूरतमंदों को दान देने से पुण्य के द्वार खुल जाते हैं।
विशेष दान से बढ़ेगा पुण्य
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, पापांकुशा एकादशी पर विशेष रूप से अन्न, वस्त्र, तुलसी का पौधा, मोरपंख और कामधेनु की प्रतिमा का दान अत्यंत शुभ माना गया है। यह दान न केवल जीवन में सुख-समृद्धि लाता है, बल्कि व्यक्ति के कष्टों और दरिद्रता को भी दूर करता है।
पापांकुशा एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारंभ: 3 अक्टूबर 2025, सुबह 9:08 बजे
एकादशी तिथि समाप्त: 4 अक्टूबर 2025, सुबह 6:41 बजे
हिंदू पंचांग के अनुसार, उदया तिथि को ही व्रत का पालन किया जाता है, इसलिए मुख्य व्रत 3 अक्टूबर को रखा जाएगा। वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी 4 अक्टूबर को भी यह व्रत रख सकते हैं।
व्रत का महत्व
पापांकुशा एकादशी व्रत न केवल पापों से मुक्ति का मार्ग खोलता है, बल्कि मनुष्य के जीवन में ईश्वर की विशेष कृपा भी लाता है। इसे साधक का आत्मिक शुद्धि और भौतिक सुख-शांति का स्रोत माना गया है।
सत्कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है, और यही इस एकादशी का सार है। इस दिन किए गए दान और भक्ति के फल सदैव फलदायी होते हैं।इस खास दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत से पापों का नाश होता है, विशेष दान करें, अन्न, वस्त्र, तुलसी का पौधा, मोरपंख और कामधेनु की प्रतिमा। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। जरूरतमंदों को भोजन कराएं और पुण्य कमाएं।इस एकादशी पर अपने जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाएं।सत्कर्म ही सबसे बड़ा धर्म है।
पापांकुशा एकादशी कथा
एक समय की बात है, एक भक्त ने अत्यंत पाप किए थे और वह उनसे मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की शरण में गया। भगवान विष्णु ने उसे बताया कि यदि वह पापांकुशा एकादशी का व्रत श्रद्धा और भक्ति से रखेगा, तुलसी का पूजन करेगा, और विशेष दान करेगा तो उसके सारे पाप नष्ट हो जाएंगे।
इस व्रत को रखकर भक्त ने अपने जीवन में शांति, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति की। तब से यह एकादशी जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश करने वाली मानी जाती है।





