नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। चैत्र नवरात्रि के पहले ही दिन आपको कलस रखना होता है और माता के पहले स्वरूप की पूजा करनी होती हैं। पहले दिन मां शैलपुत्रीकी पूजा अर्चना की जाती है। शैलपुत्री की पूजा में आप हल्दी, दूर्वा, फल, फूल, भोग, चुनरी, सोलह ऋंगार का सामान इन सब सामग्री को एकत्रित करके रख लें। माता का अच्छे से ऋंगार करें। उनका चंदन टिकन करें और फल आदि चढ़ाएं। इसके बाद उनकी आरती करें। वहीं आरती करने से माता दुर्गा और प्रभावित होती हैं और जल्दी प्रसन्न होती हैं।
माता शैलपुत्री की आरती
शैलपुत्री मां बैल असवार। करें देवता जय जयकार।
शिव शंकर की प्रिय भवानी। तेरी महिमा किसी ने ना जानी
पार्वती तू उमा कहलावे। जो तुझे सिमरे सो सुख पावे।
ऋद्धि-सिद्धि परवान करे तू। दया करे धनवान करे तू।
सोमवार को शिव संग प्यारी। आरती तेरी जिसने उतारी।
उसकी सगरी आस पुजा दो। सगरे दुख तकलीफ मिला दो।
घी का सुंदर दीप जला के। गोला गरी का भोग लगा के।
श्रद्धा भाव से मंत्र गाएं। प्रेम सहित फिर शीश झुकाएं।
जय गिरिराज किशोरी अंबे। शिव मुख चंद्र चकोरी अंबे।
मनोकामना पूर्ण कर दो। भक्त सदा सुख संपत्ति भर दो।
पूजा विधि
मां शैलपुत्री की पूजा करने से जीवन में स्थिरता आती है. माता शैलपुत्री की विधिवत आराधना से वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है और घर में खुशहाली आती है।मां शैलपुत्री चन्द्रमा से सम्बन्ध रखती है. इन्हे सफ़ेद रंग खाद्य पदार्थ का भोग लगाया जाता है जैसे खीर, रसगुल्ले, पताशे आदि।मां शैलपुत्री की पूजा विधि आरम्भ करने से पहले सुबह उठाकर स्नान करें और मंदिर की साज सजावट करें।
इसके बाद कलश की स्थापना कर पूजा शुरू करें, मां की मूर्ति या तस्वीर को सिंदूर से तिलक लागाने के बाद लाल रंग के पुष्प अर्पित करें। इसके बाद माता को फल और मिठाई अर्पित करें और माता के समक्ष घी का दीपक जलाए। अगर आप अखंड दीपक जला रहे हैं तब आपको इसका अच्छे से ध्यान रखना होगा।




