नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। मौनी अमावस्या का हिंदू धर्म में बहुत ही महत्व है। इस दिन गंगा नदी में स्नान करके पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। आज के दिन आपको मौन रहकर ही स्नान करना चाहिए। इसको लेकर सबके मन में सवाल उठता है कि आखिर मौनी अमावस्या के दिन ही क्यों मौन रहकर स्नान किया जाता है तो चलिए इसके बारे में हम आपको बताते हैं।
मौनी अमावस्या के दिन क्यों रहते हैं मौन
मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने की वजह मन से जुड़ी हुई है। दरअसल शास्त्रों के अनुसार सूर्य और चंद्रमा को मन का प्रतीक माना गया है। जिसके कारण हमारा मन चंद्रमा की तरह अस्थिर और चंचल होता है। इस कारण जब हम कोई भी पूजा अर्चना करते हैं तो हमारा मन विचलित हो जाता है। कभी भी किसी पूजा विधि में कोई भी विग्रह ना आए और मौनी अमावस्या की तिथि बहुत विशेष मानी जाती है। इसलिए उस दिन मौन रहने की सलाह दी जाती है। इसका विशेष फल भी प्राप्त होता है। ऐसा मानना है कि आज के दिन यानी मौनी अमावस्या के दिन जो व्यक्ति मौन रह कर स्नान ध्यान करता है उसकी हर इच्छा पूरी होती है।
मौनी अमावस्या के दिन बन रहे हैं तीन शुभ मुहूर्त
29 जनवरी 2025 को अमावस्या तिथि का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:30 बजे से 6:22 बजे तक रहेगा।
इस दिन लाभ चौघड़िया सुबह 7:10 बजे पर प्रारंभ होगा।
अमृत चौघड़िया सुबह 8:31 बजे से 9:52 बजे तक उपलब्ध रहेगा।
शुभ चौघड़िया सुबह 11:13 बजे से 12:34 बजे तक रहेगा।
मौनी अमावस्या के दिन गंगा नदी में स्नान करने का बहुत महत्व होता है। लेकिन अगर आप गंगा नदी में किसी कारणवश स्नान नहीं कर पा रहे हैं तब आपको घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए और पूजा अर्चना करते हुए मौनी अमावस्या का फल प्राप्त करना चाहिए।
मौनी अमावस्या की पूजा विधि
मौनी अमावस्या के दिन आप सुबह उठकर मुहूर्त के अनुसार स्नान करें। इसके बाद विष्णु भगवान का ध्यान करते हुए उनके मंत्र उच्चारण करें उनकी पूजा अर्चना करें। इसके साथ ही घर की भी साफ सफाई का पूरा ध्यान रखें। घर में अगर तुलसी का पौधा लगा हुआ है तो उसके अगल-बगल साफ सफाई करके तुलसी माता की भी पूजा अर्चना करें। इससे भी आपको आज के दिन विशेष फल प्राप्त होता है।




