नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। साल 2026 की मकर संक्रांति को लेकर लोगों के बीच भ्रम व्याप्त है। कई लोग सोच रहे हैं कि यह त्योहार 14 जनवरी को है या 15 जनवरी। शास्त्रों के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के 16 घंटे तक पुण्यकाल रहेगा। यही समय स्नान, दान और सूर्यदेव की उपासना का सबसे फलदायी समय माना जाता है। इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी, गुरुवार को मनाई जाएगी, जबकि सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की रात 9:19 बजे होगा।
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है।
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का विशेष महत्व है। इसे केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि सूर्य देवता का आरंभ दिवस माना जाता है। इस दिन सूर्य अपने उत्तरायण मार्ग की ओर बढ़ते हैं, और धरती पर उनकी किरणें अधिक फलदायी होती हैं। पुराणों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति के दिन सूर्य अपने पुत्र शनि के पास जाते हैं, और इस दिन उनकी उपासना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और रोगों से मुक्ति मिलती है।
इस दिन किए गए दान का फल अक्षय और लंबे समय तक रहता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित नरोत्तम द्विवेदी और कर्मकांडी अमरेंद्र कुमार शास्त्री के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन स्नान, दान और पूजा का महत्व अधिक है। विशेष रूप से तिल, घी, अनाज और नए वस्त्रों का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन किए गए दान का फल अक्षय और लंबे समय तक रहता है।
इस साल मकर संक्रांति के साथ खरमास का समय भी समाप्त हो जाएगा। हालांकि मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश आदि अभी शुरू नहीं होंगे, लेकिन 1 फरवरी से शुक्रोदय और माघ पूर्णिमा के बाद शुभ कार्य प्रारंभ किए जा सकेंगे। आचार्यों के अनुसार, इस साल पहला वैवाहिक शुभ मुहूर्त 4 फरवरी को है। फरवरी और मार्च में कुल 28 दिन ऐसे हैं, जब विवाह योग्य शुभ मुहूर्त आएंगे।
खिचड़ी और तिल से बने प्रसाद का वितरण करते हैं
मकर संक्रांति का दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक तौर पर भी आनंद और उत्सव का दिन है। श्रद्धालु गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, खिचड़ी और तिल से बने प्रसाद का वितरण करते हैं और अपने घरों में खुशहाली लाते हैं। अगर मौसम अनुकूल रहा, तो गंगा स्नानार्थियों की भीड़ दूर-दराज के जिलों और उत्तर प्रदेश के निकटवर्ती क्षेत्रों से आती है।
इस दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल जानना बहुत आवश्यक है।
इस दिन मकर संक्रांति का पुण्यकाल जानना बहुत आवश्यक है। स्नान के बाद श्रद्धालु एक लोटे में लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देते हैं। साथ ही, सूर्य बीज मंत्र और गायत्री मंत्र का जाप करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान शिव की भी पूजा करने का महत्त्व है।
मकर संक्रांति के दिन धार्मिक पुस्तक, नए अन्न, कम्बल और वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। भोजन में खिचड़ी बनाकर सर्वप्रथम भगवान को अर्पित करना चाहिए और उसके बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण करना चाहिए। कर्मकांडियों ने बताया कि किसी गरीब व्यक्ति को बर्तन समेत तिल का दान करने से शनि से जुड़ी हर पीड़ा से मुक्ति मिलती है।
इस दिन किए गए पुण्य कर्म का प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
सूर्य का उत्तरायण मार्ग ग्रहण करने के साथ, धरती पर दिन लंबे होंगे और सूर्य की किरणें जीवन में सुख और समृद्धि लाएंगी। मकर संक्रांति का त्योहार हमें याद दिलाता है कि सूर्य की किरणें जीवन का आधार हैं, और इस दिन किए गए पुण्य कर्म का प्रभाव लंबे समय तक रहता है।
इस प्रकार, मकर संक्रांति केवल एक पारंपरिक पर्व नहीं है। यह धार्मिक, सामाजिक और प्राकृतिक चक्र का मिलन है। स्नान, दान और पूजा के जरिए हम अपने जीवन में अक्षय पुण्य, स्वास्थ्य और खुशहाली प्राप्त कर सकते हैं। श्रद्धालु यदि समयानुसार इन क्रियाओं का पालन करें, तो यह दिन उनके लिए अत्यंत फलदायी साबित होगा।
हर वर्ष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है
साल 2026 की मकर संक्रांति हमें यह संदेश देती है कि सूर्य देव की उपासना, दान और सही समय पर किए गए पुण्य कर्म जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, खुशहाली और स्वास्थ्य लेकर आते हैं। यही कारण है कि यह पर्व हिन्दू धर्म में अत्यधिक महत्व रखता है और हर वर्ष उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।




