back to top
29.1 C
New Delhi
Monday, March 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Chhath 2025:’संध्या और उषा अर्घ्य’ के बिना पूजा अधूरी,जानिए डूबते और उगते सूर्य को जल देने का धार्मिक

25 अक्टूबर से शुरू हुआ आस्था का महापर्व छठ में संतान की दीर्घायु और निरोगी जीवन के लिए सूर्य उपासना की जाती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क।आस्था का महापर्व छठ पूजा 2025 आज यानी 25 अक्टूबर से शुरू हो गया है। बिहार, झारखंड, यूपी और बंगाल समेत पूरे देश में चार दिनों तक चलने वाले इस कठिन व्रत में भगवान सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मईया की विशेष आराधना की जाती है। छठ पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है सूर्य को अर्घ्य देना, जो दो चरणों में संपन्न होता है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य और चौथे दिन उषा अर्घ्य। धार्मिक मान्यताओं के साथ ही इन दोनों अर्घ्यों का गहरा वैज्ञानिक महत्व भी है, जिसके कारण व्रती पवित्र जल में खड़े होकर यह अनुष्ठान करते हैं।

संध्या अर्घ्य: त्याग और प्रत्यूषा का महत्व

पर्व के तीसरे दिन, यानी आज 27 अक्टूबर 2025 को डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। धार्मिक रूप से इसे प्रत्यूषा अर्घ्य भी कहा जाता है, क्योंकि माना जाता है कि संध्या के समय भगवान सूर्य अपनी पत्नी प्रत्यूषा के साथ होते हैं।

धार्मिक संदेश 

डूबते सूर्य की उपासना हमें यह संदेश देती है कि जीवन में अस्त होना या कठिनाइयों को स्वीकार करना अंत नहीं है, बल्कि यह एक नए सवेरे की शुरुआत है। यह जीवन के उतार-चढ़ाव को सहजता से स्वीकार करने की प्रेरणा देता है।मान्यता है कि संध्या अर्घ्य देने से संतान को दीर्घायु प्राप्त होती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

उषा अर्घ्य: स्वास्थ्य और जीवन की पूर्णता

छठ पूजा का समापन 28 अक्टूबर 2025 को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ होगा। यह अर्घ्य सुबह के समय दिया जाता है, जब सूर्य की पहली किरणें निकलती हैं।माना जाता है कि इस समय भगवान सूर्य अपनी पत्नी उषा (Usha) के साथ होते हैं। इस अर्घ्य को देने के बाद ही व्रतियों का कठिन व्रत पूर्ण माना जाता है।

इसके वैज्ञानिक लाभ

सूर्य की पहली किरणों में खड़ा होकर जल देने से स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। ये किरणें (विशेष रूप से पराबैंगनी और अवरक्त किरणें) विटामिन-डी के संश्लेषण में सहायक होती हैं और कई रोगों को कम करने की क्षमता रखती हैं। इस प्रकार, उषा अर्घ्य का विधान स्वास्थ्य लाभ के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

इस महापर्व में सभी व्रतधारी महिलाएं 36 घंटे से अधिक समय तक निर्जला व्रत रखते हैं और सूर्य की इन दोनों अवस्थाओं की पूजा कर जीवन में निरोगी काया और खुशहाली की कामना करते हैं।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

Amitabh Bachchan ने सोशल मीडिया पर किया ऐसा ट्वीट, फैंस में मचा तहलका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल...

बंगाल से राज्यसभा की दौड़ में नई एंट्री, ममता बनर्जी ने किया नॉमिनेट, आखिर कौन हैं कोयल मल्लिक?

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की...

The Kerala Story 2 Day 1 Collection: कंट्रोवर्सी के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत ओपनिंग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोर्ट केस और सियासी विवादों के...

तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026...