नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भाद्रपद पूर्णिमा का पावन पर्व इस बार एक विशेष खगोलीय घटना के साए में मनाया जाएगा। 07 सितंबर 2025, रविवार को चंद्र ग्रहण लग रहा है, जो कि भारत में पूर्ण रूप से दृश्य होगा। इस कारण सूतक काल भी मान्य रहेगा। ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रहण काल में किए गए कार्य शुभ फल नहीं देते, ऐसे में इस अवधि में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है।
चंद्र ग्रहण 2025: समय और सूतक काल
ग्रहण प्रारंभ: रात 09:58 बजे
ग्रहण समाप्ति: रात 01:26 बजे (8 सितंबर की रात)
सूतक काल शुरू: दोपहर 12:19 बजे से
सूतक समाप्त: ग्रहण खत्म होने के साथ ही
ग्रहण के दौरान न करें ये कार्य
चंद्र ग्रहण के समय धार्मिक ग्रंथों और शास्त्रों के अनुसार, कुछ कार्य वर्जित माने गए हैं। आइए जानें किन बातों का रखें ध्यान।
भोजन न करें और न ही नया खाना बनाएं
मंदिरों के कपाट बंद रहें, पूजा-पाठ न करें
भगवान की मूर्तियों को न छुएं
गर्भवती महिलाएं विशेष सावधानी बरतें, घर के भीतर ही रहें
धारदार वस्तुओं जैसे चाकू, कैंची का प्रयोग न करें
नकारात्मक स्थानों और विचारों से दूरी बनाएं
चंद्र ग्रहण को नंगी आंखों से देखने से बचें
ग्रहण के बाद क्या करें?
ग्रहण समाप्ति के बाद कुछ धार्मिक क्रियाएं करने से शुद्धि मानी जाती है। शास्त्रों में बताए अनुसार इन उपायों को अपनाएं—
सबसे पहले स्नान-ध्यान करें, गंगाजल से शुद्धिकरण करें
भगवान विष्णु की पूजा करें, महामृत्युंजय मंत्र का जप करें
जरूरतमंदों को वस्त्र, अन्न या दक्षिणा का दान करें
इसके बाद ही भोजन ग्रहण करें
पितृ तर्पण का भी उत्तम अवसर
भाद्रपद पूर्णिमा को पितृ तर्पण करने का विशेष महत्व है। चंद्र ग्रहण के चलते, सूतक लगने से पहले तर्पण क्रिया सम्पन्न कर लेनी चाहिए। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-शांति बनी रहती है। ग्रहण के समय राहु-केतु की सक्रियता अधिक हो जाती है। ऐसे में मानसिक तनाव, रोग और अनिष्ट प्रभाव बढ़ सकते हैं। ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि इस अवधि में संयमित जीवनशैली अपनाएं और आध्यात्मिक साधना पर विशेष ध्यान दें।





