नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। इस दौरान पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त नौ दिनों तक व्रत रखकर मां की विशेष अराधना करते हैं। वहीं इस व्रत का पारण कन्या पूजन व हवन के साथ होता है। मान्यता के अनुसार जब तक कन्याओं का पूजन और हवन नहीं होता तब तक व्रत का फल भक्तों को नहीं मिलता है।
नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल शनिवार को है
नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि में कन्या पूजन व हवन घरों व मंदिरों में किया जाता है। मान्यता है कि नवरात्रि में हवन व कन्या पूजन के बाद ही व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि की महाष्टमी 5 अप्रैल शनिवार को है तो रामनवमी 6 अप्रैल रविवार को मनाई जाएगी। जानिए चैत्र नवरात्रि में अष्टमी व नवमी पर हवन का मुहूर्त, विधि व संपूर्ण सामग्री से जुड़ी जानकारी।
घर की नकारात्मकता होती है दूर
हवन में कुछ विशेष सामग्री की आहुति दी जाती है, जो देवी और देवताओं को प्राप्त होते हैं। इससे नवग्रह भी शांत होते हैं, उनसे जुड़े दोष और नकारात्मक प्रभाव भी दूर होते हैं। हवन में देव वृक्ष जैसे आम, आंवला की लकड़ियों के साथ औषधियां भी डाली जाती हैं, जिनकी आहुति देने से घर की नकारात्मकता दूर होती है और आसपास की हवा शुद्ध होती है।
जानिए कब है हवन मुहूर्त
दुर्गा अष्टमी और महा नवमी के दिन पूजा के बाद हवन कर सकते हैं। दुर्गा अष्टमी पर अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक है। दुर्गा अष्टमी का हवन इस मुहूर्त में कर सकते हैं। वहीं महा नवमी को पूरे दिन रवि योग, रवि पुष्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहे हैं। पूजा के बाद कभी भी हवन कर सकते हैं।
चेक कर लें हवन सामग्री
1. एक हवन कुंड, फूल, फूलों की माला, 5 प्रकार के फल
2. काला तिल, अक्षत्, गाय का घी, जौ, रोली, पान के पत्ते, सुपारी, इलायची, लौंग
3. मिठाई, शहद, शक्कर, जटावाला एक नारियल, सूखा नारियल, कपूर, माचिस, लोभान
4. चंदन, आम, बेल, पीपल और नीम की सूखी लकड़ी
5. गुग्गल, मुलैठी की जड़, अश्वगंधा, ब्राह्मी, पलाश और गूलर की छाल
6. अगरबत्ती, धूप, दीप, गंगाजल, पंचामृत
7. रक्षासूत्र या कलावा, हवन सामग्री के पैकेट, हवन की पुस्तिका
इस विधि से करें हवन
सबसे पहले एक साफ स्थान पर हवन कुंड स्थापित करें। हवन कुंड पर स्वास्तिक बनाकर कलावा बांधें। आम की लकड़ियों और कपूर को प्रज्वलित करें। घी, हवन सामग्री जैसे जौ, चावल, तिल आदि से मंत्रों के साथ आहुति दें। पूर्ण आहुति में नारियल में घी, पान, सुपारी, लौंग, जायफल व प्रसाद भरकर हवन कुंड में समर्पित करें। हवन के बाद भगवान गणेश व मां दुर्गा की आरती करें।
हवन करते हुए करें इस मंत्र का जाप
ओम आग्नेय नम: स्वाहा
ओम गणेशाय नम: स्वाहा
ओम गौरियाय नम: स्वाहा
ओम नवग्रहाय नम: स्वाहा
ओम दुर्गाय नम: स्वाहा
ओम महाकालिकाय नम: स्वाहा
ओम हनुमते नम: स्वाहा
ओम भैरवाय नम: स्वाहा
ओम कुल देवताय नम: स्वाहा
ओम स्थान देवताय नम: स्वाहा
ओम ब्रह्माय नम: स्वाहा
ओम विष्णुवे नम: स्वाहा
ओम शिवाय नम: स्वाहा




