नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । लाभ पंचमी का पर्व हर वर्ष कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को कुछ स्थानों पर सौभाग्य पंचमी या ज्ञान पंचमी के नाम से भी जाना जाता है। विशेष रूप से गुजरात में यह त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
लाभ पंचमी के दिन व्यवसाय से जुड़े लोग मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं। इस अवसर पर खासकर बहीखाते और लेखा-जोखा की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा से सौभाग्य में वृद्धि होती है और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन को नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी बेहद शुभ माना गया है। आइए जाने लाभ पंचमी 2025 में कब पड़ेगी और इसकी पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
किस दिन मनाई जाएगी लाभ पंचमी ? जाने पूजा का शुभ मुहूर्त
लाभ पंचमी का पर्व इस साल 26 अक्टूबर 2025, रविवार को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि की शुरुआत 26 अक्टूबर को तड़के 3 बजकर 48 मिनट पर हो रही है, और यह तिथि समाप्त होगी 27 अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 4 मिनट पर। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए लाभ पंचमी का व्रत और पूजा 26 अक्टूबर को ही रखा जाएगा।
मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे शुभ समय –
लाभ पंचमी पूजा मुहूर्त सुबह 6:29 बजे से 10:13 बजे तक रहेगा। इस विशेष समय में पूजा करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और घर-व्यापार में समृद्धि बनी रहती है।
जानिए लाभ पंचमी का महत्व
लाभ पंचमी दीपावली के पांचवें दिन मनाया जाने वाला एक अत्यंत शुभ पर्व है, जिसे खासतौर पर व्यापारिक वर्ग के बीच विशेष महत्व प्राप्त है। इस दिन को नई दुकान, व्यापार या फैक्ट्री शुरू करने के लिए बेहद शुभ मुहूर्त माना जाता है। साथ ही इस दिन नए खाता-बही की शुरुआत करना भी परंपरागत रूप से लाभकारी माना गया है। शुभ-लाभ और स्वस्तिक का चिन्ह बनाकर बहीखातों का उद्घाटन किया जाता है और मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत भी रखते हैं। मान्यता है कि लाभ पंचमी पर की गई पूजा और उपासना से न केवल व्यापार में तरक्की होती है, बल्कि सौभाग्य, सुख-शांति और कष्टों का निवारण भी संभव होता है।
लाभ पंचमी पर कैसे करें मां लक्ष्मी की पूजा? जानिए विधि
लाभ पंचमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि कर लें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और पूजा स्थान को शुद्ध करके वहां भगवान गणेश, भगवान शिव और मां लक्ष्मी की प्रतिमाएं या चित्र स्थापित करें। भगवान गणेश को चंदन, सिंदूर, फूल और दूर्वा अर्पित करें। भगवान शिव की पूजा में बेलपत्र, सफेद पुष्प और धतूरा चढ़ाएं। मां लक्ष्मी को हलवा और पूड़ी का भोग अर्पित करें और धन-संपत्ति, सफलता और सौभाग्य की कामना करें। पूजा के अंत में आरती करें और उपस्थित सभी लोगों में प्रसाद वितरित करें। यह पूजा विधि न केवल धार्मिक रूप से शुभ मानी जाती है, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करती है।
अस्वीकरण : इस लेख में प्रस्तुत उपाय, लाभ, सुझाव केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से दिए गए हैं। हम इन बातों की पुष्टि या समर्थन नहीं करते हैं। यह जानकारी विभिन्न स्रोतों जैसे पंचांग, ज्योतिषीय गणनाओं, धर्मग्रंथों और मान्यताओं से संकलित की गई है।




