नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की इंदिरा एकादशी पितृपक्ष में विशेष महत्व रखती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है और पूर्वजों की आत्मा को शांति व मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह दिन आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
श्राद्ध करने वालों के लिए इंदिरा एकादशी अत्यंत खास मानी जाती है। इस व्रत से पापों का क्षय होता है और पूर्वजों की आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है। जीवन में शांति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति की संभावना बढ़ती है। पितृपक्ष में इसका पालन करने से विशेष पुण्यफल की प्राप्ति होती है।
इंदिरा एकादशी का शुभ मुहूर्त
एकादशी तिथि प्रारम्भ: 17 सितंबर 2025, 12:21 AM
एकादशी तिथि समाप्त: 17 सितंबर 2025, 11:39 PM
पारण (व्रत तोड़ने का समय): 18 सितंबर, 06:27 AM से 08:53 AM तक
द्वादशी समाप्ति समय: 18 सितंबर, 11:24 PM
इंदिरा एकादशी व्रत पूजा विधि:
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें। भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगा जल या शुद्ध जल से अभिषेक करें, चंदन, अक्षत, फूल, धूप और दीप से पूजन करें। विष्णु सहस्रनाम या मंत्र का जप करें। पूजा के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आरती करें। दिनभर भक्ति और स्मरण में रहें। तुलसी जी और सात्विक भोग अर्पित करें। व्रत पारण समय में अगले दिन खोलें।
पूजा सामग्री की लिस्ट- भगवान विष्णु का चित्र/मूर्ति, तुलसी दल, पुष्प नारियल, सुपारी, फल, धूप, दीप, घी, अक्षत (चावल), पंचामृत, मिष्ठान
इंदिरा एकादशी संध्या और दान विधान:
संध्या समय पीपल के नीचे या नदी किनारे घी का दीपक जलाएं। मान्यता है कि यह दीपक नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। इस दिन गरीबों, ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े या दक्षिणा दें। तिल, गुड़, फल और अनाज का दान विशेष रूप से शुभ माना जाता है। दान करने से धार्मिक मान्यता अनुसार कई गुना अधिक पुण्यफल मिलता है।
इंदिरा एकादशी मंत्र जप:
इस दिन ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जप करें। हिंदू धर्म में मंत्र जप का विशेष महत्व है। नियमित जप करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।





