नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । हिन्दू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पुण्यदायक और शुभ माना जाता है। यह महीना भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय होता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के दौरान भोलेनाथ माता पार्वती के साथ धरती पर भ्रमण करते हैं और इसी समय वे अपने भक्तों पर विशेष कृपा भी बरसाते हैं। इस पावन महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए भक्त विशेष रूप से पूजा-पाठ, व्रत और जलाभिषेक जैसे उपाय करते हैं।
सावन के सोमवार का व्रत विशेष फलदायी माना गया है। कहा जाता है कि जो श्रद्धा और नियम से यह व्रत करता है, उसे मनचाहा वर या वांछित फल प्राप्त होता है। यदि आप भी इस सावन सोमवार का व्रत कर रहे हैं, तो जानिए उज्जैन के विद्वान आचार्य आनंद भारद्वाज से कि इस दिन किन बातों का पालन जरूरी है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना वह समय होता है जब भगवान शिव स्वयं सृष्टि के संचालन में संलग्न रहते हैं। ऐसा कहा जाता है कि इसी पवित्र महीने में माता पार्वती की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। तभी से यह परंपरा चली आ रही है कि सावन मास में शिव-पार्वती की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही, सावन सोमवार का व्रत न केवल आध्यात्मिक लाभ देता है, बल्कि यह मानसिक और शारीरिक शुद्धि का भी एक प्रभावी माध्यम माना गया है। अब आइए जानें कि इस वर्ष सावन महीने में कुल कितने सावन सोमवार पड़ रहे हैं।
इस दिन पड़ेगा सावन सोमवार
पहला सोमवार व्रत – 14 जुलाई
दूसरा सोमवार व्रत – 21 जुलाई
तीसरा सोमवार व्रत – 28 जुलाई
अंतिम सोमवार व्रत – 4 अगस्त
सावन सोमवार का धार्मिक महत्व क्या है?
हिन्दू धर्म में सावन का महीना अत्यंत पवित्र और शुभ माना जाता है। इस माह के दौरान देशभर के शिवालयों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। खासकर सावन के प्रत्येक सोमवार को व्रत रखने की परंपरा का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से सावन सोमवार का व्रत रखकर भगवान शिव की आराधना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह व्रत श्रद्धा, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है, जो भक्त को आध्यात्मिक बल के साथ-साथ मानसिक शांति भी प्रदान करता है।
सावन सोमवार व्रत के दौरान जरूर करें इन नियमों का पालन
सावन सोमवार का व्रत रखने वालों को कुछ विशेष नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके। नीचे दिए गए नियमों का पालन करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है :-
– व्रत वाले दिन प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ, सात्विक वस्त्र धारण करें।
– पूरे दिन सात्विकता का पालन करें। उपवास के दौरान केवल फल, दूध और पानी का सेवन करें। नमक, मिर्च और तले-भुने भोजन से परहेज करें।
– शाम को भगवान शिव की विधिवत पूजा करें और चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करना न भूलें।
– व्रत के दिन बाल और नाखून काटने से बचना चाहिए, क्योंकि इसे अशुभ माना जाता है।
– व्रत के दौरान मन, वचन और कर्म से पवित्रता बनाए रखें। झूठ बोलने, छल-कपट करने और किसी की निंदा करने से बचें।
– दिनभर संयम, अनुशासन और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
– यथाशक्ति दान-पुण्य करें और हर सोमवार को श्रद्धा से व्रत रखने के बाद भगवान शिव की पूजा के उपरांत ही पारण करें।





