नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्म में देवी-देवताओं व ग्रहों की खास कृपा पाने जप और व्रत को सबसे अच्छा माना गया है, जिसमें विधि-विधान से व्रत करने से ना केवल मन बल्कि, शरीर और आत्मा भी शुद्ध होती है। यही कारण कि ऋषि-मुनि साधु प्राचीन काल से ही व्रत रखने की परंपरा का पालन करते आ रहे हैं। हर दिन किसी न किसी देवता या ग्रह को समर्पित होता है। ऐसे ही गुरुवार का दिन भी भगवान नारायण को समर्पित होता है। इस दिन नियम से व्रत पूजा करने पर इनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं गुरुवार व्रत के नियमों के बारे में,
गुरुवार व्रत के लाभ
गुरु ग्रह का शुभ फल पाने व भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने इस दिन व्रत करना चाहिए। इनकी विधिपूर्वक पूजा करने से आपकी समस्त ग्रह बाधा और कष्टों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, लगातार सात दिन या एक्कीस दिन तक गुरुवार का व्रत रखने और गुरु ग्रह की पूजा करने से बृहस्पति ग्रह से संबंधित सभी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
विवाह की अड़चन दूर होते है।
विवाह में देरी श बाधा आने पर जातकों को गुरुवार का व्रत जरूर रखना चाहिए, इसमें भगवान विष्णु और केले के पेड़ की पूजा की जाती है. इससे आपके विवाह के अड़चन दूर होते है।
भगवान विष्णु के साथ ही देवी मां लक्ष्मी की कृपा पाने गुरुवार का व्रत जरुर रखना चाहिए। इससे आपके जीवन में धन संबंधी सभी परेशानियां खत्म हो जाती हैं गुरुवार व्रत रखने से वैवाहिक जीवन की अशांति दूर होती है साथ ही आर्थिक स्थिति और स्वास्थ्य को बेहतरी मिलती है।
कब और कितने रखें गुरुवार व्रत?
अगर आप पहली बार गुरुवार का व्रत रखने जा रहे तो आपको आने वाले गुरुवार को पुष्य नक्षत्र में शुरू करना चाहिए। व अपनी इच्छा और आस्था के अनुसार 5, 11, 21, 51, 101 का संकल्प लेकर व्रत को शुरु करना चाहिए।
गुरुवार के व्रत में सबसे अहम नियम है कि इस व्रत की शुरुवात पौष माह में नहीं करनी चाहिए, इसे आप किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार व पुष्य नक्षत्र में पड़नेवाले गुरुवार से शुरु कर सकते है। इसके लिए आपको 16 गुरुवार व्रत करना होता है व लगातार 3 साल तक भी कर सकते है।
गुरुवार व्रत विधि
इस व्रत में आपको पीले कपड़े पहनकर साफ जल से स्नान आदि से निवृत होकर जरुरी सामान को इकट्ठा कर ले। जिसमें केला, हल्दी, गुड़, चने की दाल इन सबको जमाकर विष्णु भगवान की फोटो या मूर्ति को स्नान कराकर जल और हल्दी से साफ करें। इसके बाद भगवान की प्रतिमा पीले कपड़े पर रख पीले चावल गुरु मंत्रों और श्लोकों का जाप करते हुए अर्पित करें । साथ ही घी का दीपक जलां पीले रंग की मिठाई बनाएं । और भगवान बृहस्पति को मिठाई का भोग लगाएं। इस दिन एक समय ही भोजन किया जाता है। इसदिन व्रती को नहाने में साबून का उपयोग ना कर मिट्टी का प्रयोग करे।
गुरुवार व्रत में नमक वाला भोजन का मनाही होता है, इसमें ब्रहस्पति व्रत की कथा को सुन अपना व्रत समाप्त करें। इस दिन केले के पेड़ की हल्दी, चावल और चना दाल चढ़ाकर पूजा करनी चाहिए। इस दिन गाय को हल्दी डाली हुई आटे की रोटी बना जरूर खिलाएं। साथ ही गुड़ खिलाने से सभी कष्ट दूर होते है। इस दिन उड़द की दाल और चावल का सेवन नही करना चाहिए । आप पीले ही भोजन करे। इससे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस दिन पीला कपड़ा, चने की दाल और केला चढ़ाने के बाद इन सभी चीजों का गरीबों को दान करना चाहिए।





