नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। होली का पर्व अब करीब है। यह त्योहार दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन किया जाता है और उसके अगले दिन चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर रंगों की होली खेली जाती है। इस वर्ष होलिका दहन 3 मार्च को किया जाएगा। इस दिन लोग चौराहों या खुले स्थानों पर लकड़ियां इकट्ठा कर विधि-विधान से अग्नि प्रज्वलित करते हैं। मान्यता है कि होलिका दहन की अग्नि को देखना पांच प्रकार के लोगों के लिए शुभ नहीं माना जाता। इन्हीं परंपराओं के चलते कई जगहों पर नई दुल्हन होली से पहले अपने मायके चली जाती है। आइए जानते हैं इसके पीछे की मान्यताओं के बारे में।
नई दुल्हन नहीं देखती होलिका दहन की अग्नि
हिंदू परंपराओं में अक्सर देखा जाता है कि विवाह के बाद पहली होली से पहले नवविवाहिता को मायके भेज दिया जाता है। मान्यता है कि नई दुल्हन अपने ससुराल में होलिका दहन नहीं देखती। पौराणिक कथा के अनुसार, होलिका का विवाह इलोजी से होने वाला था, लेकिन शादी से पहले ही उसने अपने भाई हिरण्यकश्यप के कहने पर उसके पुत्र प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश कर लिया। जहां वह स्वयं भस्म हो गई। वहीं, जब इलोजी की मां बारात लेकर आयी और अपनी होने वाली बहू को चिता पर देखा तो वह बहुत दुखी हुई और उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए। इसी कथा के आधार पर यह परंपरा प्रचलित है कि नई दुल्हन होली से पहले ससुराल से मायके चली जाती है।
सास-बहू
लोक मान्यताओं के अनुसार सास और बहू का एक साथ खड़े होकर होलिका दहन देखना शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि यदि दोनों मिलकर अग्नि दर्शन करती हैं तो उनके रिश्ते में तनाव और मतभेद बढ़ सकते हैं। ऐसी धारणा है कि इससे आपसी सामंजस्य प्रभावित होता है और पारिवारिक क्लेश बढ़ने से संबंधों में खटास आ सकती है।
इकलौती संतान की मां
जिन महिलाओं की इकलौती संतान होती है, उन्हें भी होलिका दहन देखना नहीं चाहिए। ऐसा माना जाता है कि अग्नि के दर्शन से बच्चे के भाग्य या सुरक्षा पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। पौराणिक कथा के मुताबिक भक्त प्रह्लाद अपने पिता हिरण्यकश्यप की इकलौती संतान थे।
गर्भवती महिलाएं
परंपरा में गर्भवती महिलाओं को होलिका दहन के दौरान अग्नि के पास जाने या उसका परिक्रमा करने से परहेज करने की सलाह दी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इससे उनके लिए शुभ प्रभाव नहीं होता। साथ ही, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी यह सुझाव दिया जाता है कि तेज आग और धुएं से गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए उन्हें इस दौरान सुरक्षित दूरी बनाए रखना जरूरी माना जाता है।
नवजात शिशु
नवजात शिशुओं को होलिका दहन के आसपास नहीं ले जाना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि जहां खुले स्थानों पर होलिका दहन किया जाता है, वहां नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय रहती है। इसलिए छोटे बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए उन्हें ऐसे स्थानों से दूर रखा जाता है।





