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Holi 2025: क्या है होलिका दहन ? जाने इससे जुड़ी हिंदू पौराणिक कथा और पूजा विधि

होलिका दहन में इस पूजा को क्यों करना जरुरी होता है, क्या है इसका महत्व जानें डिटेल में।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। रंगों का त्योहार यानी होली जिसमें कुछ दिन की दूरी बची है। जिसे भारत में बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है, हम रंगों की मस्ती से सराबोर हो, लेकिन इससे पहले होलिका दहन मनाया जाता है। जानिए इसका महत्त्व? 

होलिका दहन

हर साल की ही तरह इस बार भी मार्च में पड़नेवाली होली, जो इस बार 14 मार्च को मनाई जाऐगी वही इससे पहले इसमें मनाया जानेवाला एक महत्वपूर्ण रस्म होता है, जिसे हम कहते है होलिका दहन जो इस साल गुरुवार 13 मार्च, 2025 को पड़ रहा है।

होलिका दहन क्या है?

होलिका को छोटी होली के नाम से भी जाना जाता है। जो होली से एक दिन पहले संध्‍याकाल में मनाया जानेवाला रस्म होता है। ये एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है। जिसमें सूर्यास्त के बाद विधि-विधान से सूखी लकड़ियों व गाय के उपलों को इकट्ठा कर इसे सजाकर एक बीचोबीच होलिका तैयार की जाती है। जिसे नारियल व कच्चा सूत द्वारा बांधकर खड़ा किया जाता है। इसे गंगाजल से पवित्र कर यहां रंगोली बना, इसमें महिलाओं पुरुषों द्वारा कुछ जरुरी पूजा सामग्री द्वारा इसके गोल घूमकर पूजा की जाती है। 

आखिर कैसे पड़ा होलिका दहन नाम

होलिका दहन होली के एक दिन पहले शाम को दिन ढलने पर मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान होता है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जानेवाला होलिका जलाना शामिल है। इसे हिरण्‍यकश्‍यप की बहन होलिका द्वारा हिरण्‍यकश्‍यप के बेटे व विष्णु भक्त प्रहलाद को लेकर बैठकर जलने पर इसका नाम होलिका पड़ा।

जिसमें हिरण्यकश्यप द्वारा प्रह्लाद को मारने के लिए कई जतन किए जाने पर भी प्रह्लाद भगवान की कृपा से बचते रहे। इसपर भाई हिरण्यकश्यप द्वारा अपनी बहन को आदेश दिया गया कि, होलिका प्रह्लाद को लेकर आग आग में प्रवेश करे। होलिका को ब्रह्मा ब्रह्मा जी ने वरदान दिया था वह किसी भी तरह की आग में नहीं जलेगी। उन्हें ऐसी चादर मिली थी जिसे ओढ़ने के बाद आग भी जला नही सकती थी। लेकिन इस आग में होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर बैठी जिसमें विष्‍णु भक्त प्रहलाद तो बच गए किंतु होलिका जलकर मर गईं। तभी से इसे बुराई पर सच्चाई और अच्छाई की जीत माना जान इस त्योहार को मनाया जाने लगा ।

होलिका दहन का समय

होलिका दहन -गुरुवार, 13 मार्च 2025

होलिका दहन मुहूर्त- रात 11:26 से 12:31 दोपहर, 14 मार्च तक

रंग होली शुक्रवार-14 मार्च 2025

भद्रा सांय- 06:57 बजे से रात्रि 08:14 बजे तक

भद्रा मुख रात्रि 08:14 PM से 10:22 पीएम तक

नोट: भद्रा काल में पड़ रहे प्रदोष काल में होलिका दहन करें

तिथि‍ व समय

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ 13 मार्च 2025 को प्रातः 10:35 बजे से

पूर्णिमा तिथि 14 मार्च 2025 को दोपहर 12:23 पर समाप्त होगी

हिंदू धर्मग्रंथोंनुसार, होलिका दहन प्रदोष काल के दौरान किया जाना चाहिए, जो सांय के बाद शुरू होता है, क्योकि इस समय पूर्णिमा तिथि प्रबल होती है। लेकिन पूर्णिमा तिथि के पहले समय पर भद्राकाल होता है। जिसमें शुभ कार्यो को करने से बचना चाहिए। होलिका दहन के लिए सही मुहूर्त देखंना अन्य त्योहारों की तुलना ज्यादा जरुरी होता है। क्योकि इसमें किए गए पूजा का गलत असर भी होता है। जबकि इसे सही मुहूर्त में करने पर सुख समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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