नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्म ग्रंथों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे उनके प्रति भक्ति और आत्मशुद्धि के उपाय के रूप में किया जाता है। हर महीने दो एकादशी होती हैं, जिससे सालभर कुल 24 एकादशी व्रत किए जाते हैं।
हिंदू पंचांग के अनुसार, मार्गशीर्ष माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत की परंपरा की शुरुआत इस उत्पन्ना एकादशी से करनी चाहिए।
मान्यता है कि इस दिन माता एकादशी का जन्म हुआ था, जिन्होंने भगवान विष्णु के शरीर से उत्पन्न होकर राक्षस मूर का वध किया। इस बार नवंबर में उत्पन्ना एकादशी कब है और इसका पूजन व व्रत पारण का शुभ मुहूर्त जानना श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण है।
उत्पन्ना एकादशी कब है 2025
हिंदू पंचांग के अनुसार, यह एकादशी तिथि 15 नवंबर 2025 को रात 12:49 बजे शुरू होकर 16 नवंबर 2025 को रात 2:37 बजे समाप्त होगी। इसलिए इस वर्ष उत्पन्ना एकादशी का व्रत 15 नवंबर 2025, शनिवार को रखा जाएगा।
उत्पन्ना एकादशी का महत्व और व्रत का फल
उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से अत्यधिक पुण्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि यह व्रत हजारों यज्ञ के बराबर फल देता है। एकादशी व्रत से पापों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और ऐश्वर्य आता है।
उत्पन्ना एकादशी 2025 के पूजन मुहूर्त इस प्रकार हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:58 से 05:51 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:27 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 01:53 से 02:36 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05:27 से 05:54 बजे तक
अमृत काल: दोपहर 03:42 से शाम 05:27 बजे तक
इन शुभ समयों में पूजा और व्रत करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
उत्पन्ना एकादशी व्रत पारण का मुहूर्त
उत्पन्ना एकादशी व्रत का पारण 16 नवंबर 2025, रविवार को किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ मुहूर्त दोपहर 01:10 बजे से 03:18 बजे तक रहेगा।
Disclaimer: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।





