नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। आज दशहरा है। बुराई पर अच्छाई की जीत का ये त्योहार पूरे देश में पूरे उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन बुराई के प्रतीक रावण के पुतले जलाए जाते हैं और कामना की जाती है कि दुनिया में अच्छाई का राज बना रहे। लेकिन क्या आपको पता है कि दशहरा मनाया क्यों जाता है? दशहरे के पीछे की कहानी क्या है? चलिए जानते हैं।
दशहरे के पीछे की अद्भुत कहानी
जब राम, सीता और लक्ष्मण 14 साल के वनवास पर निकले थे तब रावण ने सीता का अपहरण कर लिया था। रावण साधू का भेस लेकर दक्षिणा मांगने के बहाने सीता की कुटिया के बाहर गया, सीता को धोखे से लक्ष्मण रेखा लांघने पर मजबूर किया और फिर सीता का अपहरण कर लिया। रावण सीता से शादी करना चाहता था। उसने लंका में अशोक वाटिका में सीता को बंधक बनाकर रखा था। इधर सीता की खोज के दौरान राम को हनुमान मिले। जब इस बात का पता चला कि सीता का हरण रावण ने किया है तो राम ने हनुमान को लंका भेजा। वहां पहुंचकर हनुमान ने रावण को समझाया कि वो देवी सीता को अपनी कैद से रिहा कर दे, लेकिन रावण नहीं माना।
दशमी के दिन हुआ रावण का वध
भगवान राम ने सुग्रीव की वानर सेना को साथ लिया और समुद्र के रास्ते लंका पहुंच गए। रावण को अपने सोने की लंका, अपनी सेना और अपनी शक्तियों पर घमंड था। उसे लग रहा था कि कुछ वानरों की सेना और राम-लक्ष्मण जैसे दो सुकुमार उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते। युद्ध शुरू हुआ और रावण मारा गया। रावण के साथ उसका अहंकार भी मारा गया। जिस दिन राम ने रावण का वध किया वो दशमी का दिन था। उस दिन के बाद से इस दिन को विजय दशमी के तौर पर मनाया जाने लगा। इस दिन को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। इस दिन लोग अपने अंदर की बुराइयों को रावण के साथ जलाने और अच्छाई के रास्ते पर चलने का प्रण लेते हैं।
विजय दशमी की एक और कहानी
एक और मान्यता है कि पूरी दुनिया महिषासुर नाम के राक्षस से परेशान थी। तब महिषासुर के आतंक से लोगों को मुक्ति दिलाने के लिए मां दुर्गा ने चंडी का रूप लिया था। लगातार नौ दिन तक मां दुर्गा और महिषासुर की सेना के बीच युद्ध चला था और दसवें दिन महिषासुर का वध मां दुर्गा ने कर दिया था। कहा जाता है कि इसलिए विजय दशमी मनाई जाती है।
दशहरे पर शस्त्र पूजन का महत्व
दशहरे के दिन भगवान राम और मां दुर्गा ने बुरी शक्तियों का अंत किया था। इसलिए माना जाता है कि इस दिन शस्त्र पूजा करने से भय से मुक्ति मिलती है और नई ऊर्जा मिलती है। भारतीय सेना भी दशहरे के दिन शस्त्र पूजा करती है।





