नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। दिवाली रोशनी का त्योहार है। हर साल बड़े ही हर्षोउल्लास के साथ मनाए जाने वाला त्योहारों में से एक है। दिवाली का त्योहार धनतेरस के दिन से शुरू हो जाता है। जो पांच दिनों तक चलता रहता है। छोटी दिवाली, बड़ी दिवाली, गोवर्धन और फिर भाई दूज के बाद यह त्यौहार समाप्त हो जाता है।लेकिन इस साल ये त्योहार कब मनाया जायेगा ये सवाल सबको परेशान कर रहा हैं। तो चलिए जानते हैं।
1 या 31 जानें कब है दिवाली
इस बार दिवाली का त्योहार को लेकर महाकंफ्यूजन उत्पन्न हो रहा है। वहीं सामने आ रही मिडिया की रिपोट्स के अनुसार काशी, अयोध्या, देवघर और दरभंगा के प्रमुख्य पंडितो का कहना हैं कि, दीपावली का त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। अमावस्या की तिथि 1 नवंबर को है, लेकिन दीपावली 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। 1 नवबंर को अमावस्या तिथि प्रदोष और निशिता काल को स्पर्श नहीं कर रही है जबकि 31 अक्टूबर को अमावस्या तिथि प्रदोष काल से लेकर निशिता काल तक व्याप्त रहेगी।इसके साथ ही पड़ितों ने बताया कि, 1 नवंबर को आयुष्मान योग और स्वाति नक्षत्र का संयोग भी बन रहा है. ले्किन, तिथियों और पंचांग के अनुसार, इस बार 31 अक्टूबर को ही दिवाली मनाना ज्यादा शुभ मानी जाएगी।
दो दिन मनाई जाएगी दिवाली
दिवाली के इस त्योहार को लेकरपंडितों की भी अलग अलग राय हैं। आपको बता दें कि, अयोध्या में दिवाली का त्योहार 1 नवंबर को मनाया जाएगा। जबकि, काशी के पंडितों के मुताबिक, दिवाली 31अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस प्रकार ही कई और जगाओं पर भी 1और 31 को लेकर विचार हो रहा हैं।
दिवाली मानाने का महत्त्व
मान्यताओ के अनुसार इस दिन जब भगवान राम रावण का वध करने अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 साल वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे। तब सभी अयोध्यावासी भगवान राम के आगमन में घी के दीपक जलाए थे।इस दिन जातक माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा करके उनकी कृपा भी प्राप्त करते हैं। इस दिन की एक और कहानी हैं कहते हैं कि इसी दिन समुद्र मंथन से अमृत प्राप्त हुआ था, और इसी कारण इसे अमृत पान दिवस भी कहा जाता है।
दिवाली शुभ मुहूर्त
इस साल दिवाली पर पूजन के लिए एक नहीं बल्कि दो मुहूर्त मिलेंगे। पहला शुभ मुहूर्त प्रदोष काल में है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05 बजकर 36 से रात्रि 08 बजकर 11 मिनट के बीच रहेगा, जिसमें वृषभ काल शाम 6 बजकर 20 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 15 मिनट तक रहेगा। इसमें भी मां लक्ष्मी का पूजन किया जा सकता है।
दिवाली पूजा विधि
माता लक्ष्मी की पूजा से पहले आपको अपने घर की भी पूजा अर्चना करना चाहिए। दिवाली साफ सफाई वाला त्योहार भी माना जाता है। इसलिए दिवाली पूजा विधि में हमें खास ध्यान देना चाहिए। पूजा करते समय सबसे पहले आप पूजा स्थल को अच्छी तरह से साफ कर लें। फिर चौकी पर लक्ष्मी गणेश की मूर्ति स्थापित करें।। यदि संभव हो तो नई मिट्टी की मूर्ति स्थापित करें। और गणेश जी के दाहिने तरफ माता लक्ष्मी की मूर्ति रखें।
पूजा स्थान पर गंगाजल छिड़के, इसके बाद चौकी पर भी थोड़ा सा गंगाजल छिड़के। हाथ में लाल या पीले फूल लेकर गणेश जी का ध्यान करें। गणेश जी को तिलक लगाए और उन्हें मोदक अर्पित करें। माता लक्ष्मी को सिंदूर का तिलक लगाए और मां लक्ष्मीा के मंत्र का जाप करें। इसके बाद प्रसाद सामग्री को चढ़ाएं। पूजन के बाद माता लक्ष्मी और गणेश जी की आरती करें और भोग अर्पित करें। लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा के बाद दीप जलाएं और सबसे पहले आप लक्ष्मी जी के सामने पांच या सात घी के दीपक जलाएं। अंत में आरती को पूरे घर में घुमाएं। और मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश का आशीर्वाद प्राप्त करें।





