नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । हिंदू धर्मं में ऐसे तो हर दिन ही किसी न किसी देवी देवता को समर्पित होता है, जिसमें वे दिन अनुसार व्रत पूजा का संकल्प लेकर अनुष्ठान करते है। बिलकुल वैसे जैसे, रविवार को सूर्य भगवान को सोमवार को शिव भगवान को समर्पित है वैसे ही बुधवार भगवान गणेश को समर्पित है इस दिन भगवान गणेश के अलावा बुध देव की भी पूजा की जाती है। जिसका व्रत करने से व्य्रक्ति के जीवन में धन-धान्य में कमी नहीं रहती तो आइए जानते है बुधवार व्रत की पूरी कथा व व्रत विधि ।
इस दौरान आप कोई फल या दूध का सेवन भी कर सकते है
धार्मिक मान्यता अनुसार, बुधवार का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य व व्यापार में वृद्धि होती है। जिससे घर में सुख वैभव बढ़ता है आइए जानते है इस व्रत की पूरी विधि और इसमें होनेवाले परहेजों के बारें में। बुधवार के दिन व्रत रखनेवाले व्यक्ति को एक समय का ही भोजन करना चाहिए जिसमें मूंग की दाल का हलवा, दही, या कोई हरी वस्तु से बनी चीजों का सेवन कर सकते हैं। इस दौरान आप कोई फल या दूध का सेवन भी कर सकते है।
बुधवार व्रत में क्या नहीं खाना चाहिए
बता दे कि, बुधवार व्रत में नमक का सेवन नही करना चाहिए, इस व्रत में पान का सेवन भी नहीं किया जाता है।
कब से शुरू करें बुधवार व्रत
ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, बुधवार व्रत को शुक्ल पक्ष के अमावस निकल जाने के बाद पहले बुधवार से शुरु किया जाना चाहिए। इस दिन से आप इस व्रत को 21 या 45 की संख्या में संकल्प लेकर शुरु कर सकते है।
बुधवार व्रत पूजा विधि
सुबह उठकर सबसे पहले स्नान ध्यान कर घर की सफाई करके घर के ईशान कोण में मुंह करके भगवान गणेश और बुध देव की आगे दीपक जलाएं आरती करें व हलवा, बेसन के लड्डू या पंजीरी का भोग लगा पूजा करें। इस दिन हरे रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है।
बुधवार व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार बुधवार व्रत में कथा का पाठ आवश्यक माना जाता है। एक समय की बात है समतापुर नगर में मधुसूदन नामक एक व्यक्ति रहता था, जो बहुत धनवान माना जाता था। बलरामपुर नगर की सुंदर और गुणवान कन्या से मधुसूदन का विवाह हो जाने के पश्चात वो अपनी पत्नी को लेने बुधवार के दिन उसके मायके पहुचं गया। इसपर कन्या के माता पिता ने कहा कि, इस दिन ससुराल नही भेजा जाता व ना ही शुभ दिन के लिए यात्रा की जाती है। लेकिन सबकी बातों को अनसुना कर मधुसूदन अपने पत्नी संगीता को अपने घर ले आया। दोनों कुछ दूर ही चले थे कि उनकी बैलगाड़ी का पहिया टूट गया। जिसके बाद दोनों को पैदल यात्रा करनी पड़ी, इस बीच पत्नी को प्यास लगने पर मधुसूदन संगीता को एक पेड़ के नीचे बिठाकर पानी लेने चला गया। जब वापस लौटा तो देखा कि उसकी पत्नी के पास उसकी शक्ल जैसा ही एक व्यक्ति बैठा हुआहै।
हर बुधवार को व्रत करुंगा
संगीता भी उसी शक्ल के दो लोग देखकर हैरान हो गई और मधुसूदन और उसके हमशक्ल में सच्चें झूठे को लेकर युद्ध होने लगा इस शोर से आसपास कई लोग जमा हो गए जिसके बाद इन्हें नगर के राजा के सामने ले जाया गया। राजा भी दोनों में अंतर नहीं कर पाया और ना ही पत्नी तब राजा ने दोनों को ही कारावास में डालने की सजा सुनाई । जिसके बाद मधुसूदन मन ही मन भगवान से प्रार्थना करने लगा कि आखिर किन पापों की सजा मिल रही है मुझे तब आकाशवाणी हुई कि, तूने अपने सास-ससुर के कहने पर भी अपनी पत्नी को ले आया ये उसी का भोग दंड है। इसके बाद मधुसूदन बुधदेव से माफी मांग प्रण लेता है कि, कभी किसी शुभ काम के लिए इस दिन यात्रा नहीं करुंगा व हर बुधवार को व्रत करुंगा अभी माफ कर दे बुधदेव।
राजा ने मधुसूदन और उसकी पत्नी को सम्मान देकर विदा किया
मधुसूदन के प्रार्थना के बाद बुध देव ने उसे माफ किया साथ ही सामने खड़ा व्यक्ति भी गायब हो गया। जिसे देखं राजा समेत सभी लोग हैरान हो गए। राजा ने मधुसूदन और उसकी पत्नी को सम्मान देकर विदा किया। और उन्हें कुछ दूरी पर ही बैलगाड़ी भी मिल गई। इसके बाद से मधुसूदन और उसकी पत्नी हर बुधवार को विधि विधान से व्रत करने लगे। और अपना सुख पूर्वक जीवनयापन करने लगें।




