नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी का पर्व आज पुरे देश में मनाया जा रहा है। शनिवार को मनाया जाएगा। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना करने से मनुष्य को अनंत सुख, वैभव और मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही, रक्षा सूत्र बांधने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं।
अनंत चतुर्दशी पूजन विधि
प्रातःकाल स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें।
फिर संकल्प लें: जल लेकर मन में कहें
मैं अनंत चतुर्दशी का व्रत कर रहा/रही हूं, मेरे समस्त पापों का नाश हो और मुझे अनंत सुख प्राप्त हो।
इसके बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का पंचोपचार या षोडशोपचार विधि से पूजन करें।
पूजा के दौरान यह मंत्र अवश्य बोलें
नमस्ते सर्वनागेन्द्र नमस्ते पुरुषोत्तम। न्यूनातिरिक्तानि परिस्फुटानि। यानीह कर्माणि मया कृतानि। सर्वाणि चैतानि मम क्षमस्व।दाता च विष्णुर्भगवान अनन्तः, प्रतिग्रहीता च स एव विष्णुः। तस्मात्तवया सर्वमिदं ततं च। प्रसीद देवेश वरान् ददस्व।
रक्षा सूत्र कैसे बांधें
रेशम का लाल धागा लें।
उसे हल्दी में डुबोकर 14 गांठें लगा लें।
भगवान विष्णु के समक्ष इस रक्षा सूत्र को समर्पित करें।
अब यह मंत्र पढ़ें
“अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान् समभ्युद्धर वासुदेव।
अनन्तरूपे विनियोजितात्मामाह्यनन्तरूपाय नमोनमस्ते।।”
पुरुष अपने दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में यह रक्षा सूत्र बांधें।
भोग व दान का महत्व
भगवान विष्णु को खीर का भोग अवश्य लगाएं।
इसके बाद किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं और यथाशक्ति वस्त्र, अन्न, दक्षिणा का दान करें।
अंत में स्वयं प्रसाद ग्रहण करें।
मान्यता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – ये चारों पुरुषार्थ सहजता से प्राप्त होते हैं। साथ ही, जीवन में चल रही परेशानियों से मुक्ति मिलती है और भगवान विष्णु की कृपा सदा बनी रहती है।
अनंत सूत्र की पूजा विधि
अनंत सूत्र की पूजा के लिए एक रेशमी या सूती धागे में हल्दी या कुमकुम लगाकर 14 गांठें लगाएं. इस अनंत सूत्र को भगवान विष्णु के सामने रखकर इसकी धूप, दीप और नैवेद्य से पूजा करें। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, चंदन, केसर और पीला मिष्ठान अर्पित करें।





