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Monday, March 2, 2026
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Amalaki Ekadashi 2026: फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी, जानिए दान और पूजा की विधि

आमलकी एकादशी 2026 फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी है जिसमें भगवान विष्णु और आंवले की पूजा करने से जीवन में खुशहाली समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल 24 एकादशी पड़ती हैं और फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। इसे रंगभरी एकादशी और आंवला एकादशी (Amla Ekadashi) के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करने से जीवन में खुशहाली, सुख-समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत विशेष पुण्यकारी माना जाता है और इसे पूरी श्रद्धा और निष्ठा से करने से मनोबल बढ़ता है।

आमलकी एकादशी 2026 की तिथि और समय

इस वर्ष आमलकी एकादशी 27 फरवरी 2026 को पड़ रहा है

द्रिक पंचांग के अनुसार आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी 2026, शनिवार को प्रात:काल 06:47 से 09:06 बजे के बीच कर सकते हैं।

आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी 2026 को प्रात:काल 06:47 से 09:06 बजे के बीच करना शुभ माना गया है। इस दिन उपवास रखने वाले भक्त पूरे दिन फलाहार का पालन करते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। पूजा सामग्री में तुलसी के पत्ते, पीले रंग के वस्त्र और मिठाई शामिल होती है। भक्तजन इस दिन आंवले (आमला) के वृक्ष की भी पूजा करते हैं और मान्यता है कि इससे जीवन में खुशहाली, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आमलकी एकादशी पर दान का महत्व

पौराणिक मान्यता के अनुसार आमलकी एकादशी पर दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन आंवले का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसके अलावा, केले, केसर और हल्दी का दान भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार पीले रंग के वस्त्र और पीले रंग की वस्तुओं का दान करना भी शुभ फलदायक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन दान करने से न केवल धार्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि आर्थिक समृद्धि और परिवार में खुशहाली भी आती है।

आमलकी एकादशी की पूजा विधि

आमलकी एकादशी के दिन सुबह स्नान करने के बाद पीले वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। व्रत के दौरान भगवान विष्णु का ध्यान लगाते हुए उनकी पूजा की जाती है। पूजा सामग्री में तुलसी के पत्ते, पीले रंग के वस्त्र और मिठाइयां शामिल होती हैं। इस दिन भक्तजन कथा सुनने और सुनाने के माध्यम से भगवान विष्णु की आराधना करते हैं और पूरे मनोभाव से उनकी आरती करते हैं। व्रत में फलाहार का पालन करना अनिवार्य है और अगले दिन व्रत का पारण किया जाता है।

व्रत के लाभ

आमलकी एकादशी का व्रत केवल धार्मिक पुण्य की प्राप्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह आर्थिक, स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन में समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। इसे करने से मानसिक शांति मिलती है, तनाव कम होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार आमलकी एकादशी के दिन पूजा, दान और व्रत का पालन करने से व्यक्ति मोक्ष और सुख-समृद्धि की प्राप्ति करता है।

आमलकी एकादशी आर्थिक समृद्धि का संदेश लेकर आता है।

आमलकी एकादशी 2026 भगवान विष्णु और आंवले की पूजा का विशेष अवसर है, जो जीवन में खुशहाली, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है। यह दिन भक्तों के लिए धार्मिक निष्ठा, परिवारिक सुख और आर्थिक समृद्धि का संदेश लेकर आता है।

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