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Wednesday, March 4, 2026
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Akshay Tritiya 2025 से पहले जानें सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Akshaya Tritiya 2025: अक्षय तृतीया के दिन देशभर में लोग सोना और कई धातु खरीदते हैं। लेकिन इसे खरीदने से पहले आपको शुभ मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। अक्षय तृतीया की तिथि को बहुत ही शुभ माना जाता है। ऐसा मन जाना है कि इस दिन आप बिना किसी मुहूर्त के कोई भी अच्छा काम आज कर सकते हैं। अक्षय तृतीया के दिन लोग सोने की खरीदारी भी करते हैं लेकिन जब आप सोने की खरीदारी करें तो सही मुहूर्त में ही करें ये काफी शुभ मन जाता है। इसके साथ ही आज के दिन विशेष रूप से माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने का विधान है, जिससे धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। 

अक्षय तृतीया तिथि और शुभ मुहूर्त

उदयातिथि के अनुसार, अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल 2025, बुधवार को मनाया जाएगा। वहीं पूजा का शुभ समय: प्रातः 5 बजकर 41 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।पंचांग के अनुसार, इस साल 30 अप्रैल को सुबह 5:41 मिनट से दोपहर 2:12 मिनट तक सोना खरीदने का सबसे अच्छा समय रहेगा। इस अवधि में की गई खरीदारी को अत्यंत लाभकारी माना जाता है और इससे घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव का आगमन होता है।और आपके घर परिवार में भी सदैव खुशहाली बानी रहती है।  

अक्षय तृतीया का महत्व 

शास्त्रों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु ने नारायण का अवतार लिया था। इसके अलावा आज के दिन से ही सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत हुई थी। और भगवान परशुराम का जन्म भी इसी दिन हुआ था। इसके अलावा मान्यता हैं कि ब्रह्म देव के पुत्र अक्षय कुमार की उत्पत्ति हुई थी, इसलिए इस तिथि को अक्षय तृतीया कहते हैं। ऐसे में इस दिन यदि आप सुख समृद्धि, धन, वैभव आदि प्राप्त करने का ये काफी अच्छा दिन होता वहीं अक्षय तृतीया के दिन किए गए अच्छे कर्म और दान-पुण्य का फल कभी खत्म नहीं होता, इसलिए लोग इसे विशेष श्रद्धा और आस्था के साथ मनाते हैं।

पूजा विधि  

अक्षय तृतीया वाले दिन आप सुबह उठकर स्नान करें। और मंदिर की सफाई करें। चौकी पर मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु, गणेश जी और कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें। प्रतिमा को गंगाजल से साफ करें। कुमकुम व चंदन का तिलक लगाएं।अक्षत, दूर्वा, पान, सुपारी, नारियल,आदि अर्पित करें। फल, मिठाई, मखाने की खीर आदि चीजों का भोग लगाएं। इसके बाद गणेश चालीसा का पाठ करें। और पूजा को आरती से समाप्त करें। इसके बाद पूजा में चढ़ाया गया भोग प्रसाद सबको दें और खुद भी खाएं।  

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