नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। आज संकष्टी चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है। कहा जाता है यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करना बहुत शुभ और फलदायी माना जाता है। संकष्टी का अर्थ होता है कष्टों से मुक्ति।फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी खास बातें।
संकष्टी चतुर्थी का महत्व
आज के दिन जातक व्रत रखते हैं ताकि उन्हें भगवान का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। संकष्टी श्री गणेश चतुर्थी का अर्थ है सभी कष्टों को दूर करने वाली चतुर्थी। मान्यता है कि जो लोग इस दिन व्रत रखते हैं, उन्हें जीवन की सभी समस्याओं का समाधान मिलता है और सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। इस दिन दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सही चीजों का दान करने से आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं से राहत मिलती है और जीवन में समृद्धि आती है।
संकष्टी चतुर्थी का दान
संकष्टी चतुर्थी केदिन तिल और गुड़ का दान करना विशेष फलदायी होता है। ऐसा करने से शनि दोष कम होता है और स्वास्थ्य-संपन्नता बनी रहती है।
2. कपड़ों का दान
जरूरतमंद या योग्य ब्राह्मण को कंबल, ऊनी वस्त्र, जूते-चप्पल आदि का दान करना शुभ है। इससे पितृ दोष शांत होता है और संतान-संबंधी परेशानियां दूर होती हैं।
3. घी का दान
घी का दान घर में सौभाग्य और समृद्धि लाता है। साथ ही इससे शुक्र की कृपा प्राप्त होती है और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
4. अन्न का दान
अनाज का दान करने से घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। यह आर्थिक संकट को दूर करता है और परिवार में समृद्धि बनाए रखता है।
5. तांबे के पात्र
पूजा समाप्ति के बाद ब्राह्मण को तांबे का पात्र और अपनी सामर्थ्य अनुसार दक्षिणा देना चाहिए। यह पूजा को पूर्णता प्रदान करता है।
किन चीजों का दान न करें
नुकीली चीजें: यह दिन नुकीली वस्तुएं दान करने के लिए ठीक नहीं है। इससे व्यक्ति को नुकसान हो सकता है।
तेल: तेल का दान मना है।हल्दी: हल्दी का दान करने से वैवाहिक जीवन में परेशानियों का खतरा रहता है।
सकट चौथ का व्रत और सही दान करने से पुण्य के साथ-साथ जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है।





