नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।10 अप्रैल 2024। मां ब्रह्मचारिणी पार्वती माता का दूसरा स्वरूप हैं। इनको तप और ज्ञान की देवी भी कहा जाता है। इनकी पूजा नवरात्रि के दूसरे दिन की जाती है। कहते हैं कि उनकी पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और घर परिवार में सुख शांति बनी रहती है।
मां ब्रह्मचारिणी का महत्त्व
नवरात्रि के दूसरे दिन, देवीके दूसरे रूप की पूजा अर्चना होती हैं। माता ने मां ब्रह्मचारिणी के रूप में भगवान शिव का ध्यान करते हुए ब्रह्मचर्य की तपस्या की थीं। इसीलिए माता को तप और ज्ञान की भी देवी कहा जाता है। इस रूप में देवी का चेहरा बहुत ही अद्भुत और भावुक होता है और वह धनुष और कमंडल धारण करती हैं। इसका अर्थ है कि मां ब्रह्मचारिणी अपने आत्मा की अद्वितीयता में लीन रहती हैं और तपस्या में लगी रहती हैं।
पूजा विधि
मां ब्रह्मचारिणी की बड़े ही भाव और सच्चे मन से की जाती है। क्योंकि नवरात्रि में मां ब्रह्मचारिणी की आराधना करने से विद्या, ध्यान, और तप की शक्ति मिलती है। पूजा के लिए सफेद वस्त्र, चाँदन, कुमकुम, फूल, और नैवेद्य की वस्तुएं उपयोग की जाती हैं। मां ब्रह्मचारिणी को धूप और दीप से पूजा जाता है, और उनके चरणों में रोली और चावल चढ़ाया जाता है। साथ ही मिठाई को भोग के रूप में रखा जाता है। इसके बाद माता रानी की आरती की जाती हैं।
इन मंत्रों का करें जाप
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
दधाना कर पद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मई ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नम:।
ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:
वन्दे वांछित लाभायचन्द्रार्घकृतशेखराम्।जपमालाकमण्डलु धराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम।धवल परिधाना ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्॥
परम वंदना पल्लवराधरां कांत कपोला पीन।पयोधराम् कमनीया लावणयं स्मेरमुखी निम्ननाभि नितम्बनीम्॥
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