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Somwar Mantra : सोमवार को महामृत्युंजय मंत्र के जाप से करें महादेव को प्रसन्न

सोमवार का दिन महादेव को समर्पित है ऐसा माना जाता है कि सोमवार के दिन महामृत्युंजय मंत्र के जाप से महादेव को प्रसन्न किया जाता है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क 18 December 2023 :   हिंदू धर्म के अनुसार सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ को समर्पित है। कहते हैं कि इस दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से बहुत अच्छा फल मिलता है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए व्रत तथा महामृत्युंजय का जाप भी किया जाता है। महामृत्युंजय एक शक्तिशाली मंत्र है। जिसको करने से सभी पापों का नाश होता है और महादेव की कृपा आपके घर परिवार पर बनी रहती है। वहीं बहुत लोग ऐसे हैं जो महामृत्युंजय जब करते तो है लेकिन उनको इस मंत्र का अर्थ ही नहीं पता होता और ना यह पता होता है कि यह मंत्र इतना खास क्यों है।

जानिए महामृत्युंजय मंत्र का महत्व

महामृत्युंजय मंत्र एक शक्तिशाली और बहुत खास मंत्र है। इसके द्वारा भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न किया जाता है।कहा जाता है कि यदि कोई व्यक्ति भय मुक्त और रोगमुक्त जीवन चाहता है और अकाल मृत्यु के डर से खुद को दूर करना चाहता है, तो उसे ‘महामृत्युंजय मंत्र’ का जाप करना चाहिए। महामृत्युंजय मंत्र भगवान भोलेनाथ का सबसे प्रिय मंत्र है। इस मंत्र के जाप से मनुष्य की सभी बाधाएं और परेशानियां खत्म हो जाती हैं। शिवपुराण और अन्य ग्रंथो में भी इसके महत्व के बारे में विस्तार से बताया गया है। शिवपुराण के अनुसार,महामृत्युंजय मंत्र के जाप से व्यक्ति को संसार के सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है।

इस दिन से शुरुआत करें महामृत्युंजय मंत्र का जाप

महामृत्युंजय मंत्र का जाप तो आप किसी दिन भी कर सकते हैं लेकिन इसकी शुरुआत करने के लिए महाशिवरात्रि का दिन सबसे अच्छा माना गया है। वहीं शास्त्रों में इस मंत्र को अलग-अलग करने का नियम बताया गया है। महामृत्युंजय का जब 1100 बार करने से भय से छुटकारा मिलता है। इस मंत्र का जब 108 बार भी कर सकते हैं। इस मंत्र को करने का सही नियम सुबह-शाम को है। आपके जीवन में कितनी भी समस्या हो यह मंत्र अपना प्रभाव जरूर दिखाता है और आपके कष्ट दूर हो जाते हैं। सुबह शाम भगवान भोलेनाथ की शिवलिंग पर बेलपत्र और जल चढ़कर इस मंत्र का जाप करें और इस मंत्र का जाप करते समय ध्यान दें कि इसका उच्चारण काफी तेज ना हो।

जानिए महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ॥

इस मंत्र का हिंदी में अर्थ है कि “हम भगवान शिव की पूजा करते हैं, जिनके तीन नेत्र हैं, जो सुगंधित हैं और हमारा पोषण करते हैं। जैसे फल शाखा के बंधन से मुक्त हो जाता है वैसे ही हम भी मृत्यु और नश्वरता से मुक्त हो जाएं।”

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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