नई दिल्ली , 21 अगस्त , रफ़्तार डेस्क : नागपंचमी हिन्दू पंचांग में एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो सर्प देवता की पूजा और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए मनाया जाता है। इस साल, नागपंचमी दिनांक 21 अगस्त 2023 यानी की आज मनाई जा रही है ! यह पर्व सोमवार के दिन आया है और इसलिए इसका महत्व बढ़ जाता है क्योंकि सोमवार भगवान शिव का दिन है !! इस पर्व को विशेष रूप से व्रत, पूजा और मन्त्रों के जाप के द्वारा मनाया जाता है।
नागपंचमी का महत्व: नागपंचमी के दिन सर्प देवता की पूजा और उनके आशीर्वाद की मांग की जाती है। विशेष रूप से नाग – नागिनों की पूजा की जाती है, इसके साथ ही, कालसर्प दोष से मुक्ति प्राप्त करने के उपाय भी किए जाते हैं, जिनसे व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति कर सकते हैं।
नागपंचमी पूजा विधि:
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पूजा का समय: नागपंचमी का पूजा समय सुबह 6 :21 से शुरू होकर 8 :53 तक रहेगा।
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पूजा सामग्री: पूजा के लिए सांप्रदायिक रूप से सर्प देवता की मूर्ति, नागनागिन की मूर्तियां, दूध, दूध मिश्रित जल, बेल पत्र, कुशा और रोली-चावल की सामग्री की आवश्यकता होती है।
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पूजा की विधि:
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पूजा की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करें।
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फिर सर्प देवता की पूजा करें, उनकी मूर्ति को दूध और जल से स्नान कराएं।
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नाग-नागिन की पूजा करें और उन्हें भोग और माला अर्पित करें।
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अनुष्ठान के बाद नाग देवता के पास जाकर उनके क्षमा प्राप्त करें और उनकी कृपा का आभार व्यक्त करें।
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कालसर्प दोष से मुक्ति के उपाय:
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नागपंचमी के दिन नाग नागिनों की पूजा करें और उनके आशीर्वाद प्राप्त करें।
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कालसर्प दोष निवारण के लिए नाग की मूर्ति को द्वार पर स्थापित करें।ये आप गोबर या मिटी से भी बना सकते हैं
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श्री सर्प सूक्ति का पाठ करें, जो वैदिक मंत्रों का संयोजन होता है और कालसर्प दोष के प्रभाव को कम कर सकता है।
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नाग नागिन के प्रतिमा का दान (अगर संभव हो तो चाँदी से बने ) और सर्प देवता की पूजा करके कालसर्प दोष से मुक्ति प्राप्त करें।
इन उपायों के साथ-साथ श्रद्धा और भक्ति के साथ नागपंचमी को मनाकर, व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि, शांति और सफलता की प्राप्ति कर सकते हैं।
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