Shaniwar Mantra: शनिदेव के इन शक्तिशाली मंत्रों का करें जाप, दूर होगी घर से दरिद्रता

हर शनिवार दिन शनि देव के पूजन और व्रत का महत्वपूर्ण होता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि का अनुभव होता है।
Mantra of Shanidev
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नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।23March 2024। शनि देव की दृष्टि जिस इंसान पर पड़ती है उसकी काया पलट जाती है। हर व्यक्ति चाहता है कि वह शनि देव की चपेट में कभी ना आए। ऐसे में शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए उनके कई चमत्कारी मंत्र बताए गए हैं।

शनि देव की पूजा का विशेष महत्व

शनि देव की पूजा शनिवार को विशेष रूप से की जाती है। शनि देव को लेकर हिंदू धर्म में कई मान्यताएं भी हैं।शनिवार की पूजा विशेष तौर पर न्याय के देव शनि ग्रह की कुदृष्टि से बचने के लिए की जाती है। शनि देव का रंग काला है इसलिए इस दिन काले वस्त्र पहनना शुभ होता है। काले कपड़ों और काले तिल का दान करना भी बहुत अच्छा माना जाता है। शनिदेव को बहुत घातक भी माना जाता है। इसलिए शनि देव की पूजा अर्चना बड़े ही विधि विधान से करनी चाहिए।

पूजा करने की विधि

शनिवार के दिन आपको प्रातः काल उठकर स्नान ध्यान करना चाहिए उसके बाद शनि मंदिर जाकर भगवान का आशीर्वाद लेना चाहिए। लेकिन ध्यान रहे पूजा करते समय आप उनकी आंखों में ना देखें। शनि देव को काला तिल बहुत प्रिय हैं इसीलिए पूजा के समय उनको काला तिल जरुर चढ़ाएं। इसके बाद कपूर जलाकर आरती करें और शनि चालीसा का भी पाठ करें।

शनि देव के इन चमत्कारी मंत्रों का करें जाप

ॐ शं शनिश्चराय नम:

ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम ।

उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात ।

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः। ऊँ शं शनैश्चराय नमः

शनि महामंत्र - ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।

छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥

शनि दोष निवारण मंत्र - ऊँ त्रयम्बकं यजामहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम।

उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षीय मा मृतात।।

शनि का पौराणिक मंत्र - ऊँ ह्रिं नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम।

छाया मार्तण्डसम्भूतं तं नमामि शनैश्चरम्।।

शनि का वैदिक मंत्र - ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।

शनि गायत्री मंत्र - ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।

ॐ शन्नोदेवीरभिष्टय आपो भवन्तु पीतये।शंयोरभिश्रवन्तु नः।

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