नई दिल्ली , 26 नवंबर 2023 : कार्तिक पूर्णिमा, हिन्दू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक मास के पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष, कार्तिक पूर्णिमा 27 नवंबर को है, और इस महत्वपूर्ण पर्व को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन भगवान शिव, देवी लक्ष्मी, और भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व है। जानते हैं, कार्तिक पूर्णिमा का महत्व, पूजा विधि, और मंत्र:
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व:
कार्तिक पूर्णिमा का महत्व धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत उच्च है। इस दिन का समर्थन पुराणों और शास्त्रों में भी मिलता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था और इसलिए इसे त्रिपुरा पूर्णिमा भी कहते हैं। इसके अलावा, कार्तिक पूर्णिमा को गंगा स्नान का विशेष महत्व दिया जाता है, जिससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस दिन गंगा, यमुना, सरस्वती, सिंधु, गोदावरी, कावेरी, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र, और सागर की स्नान का महत्व है।
कार्तिक पूर्णिमा मंत्र:
कार्तिक पूर्णिमा पूजा में निम्नलिखित मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है:
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भगवान शिव मंत्र: ‘ॐ नमः शिवाय’
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देवी लक्ष्मी मंत्र: ‘ॐ ह्रीं लक्ष्म्यै नमः’
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भगवान सूर्य मंत्र: ‘ॐ सूर्याय नमः’
कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि:
कार्तिक पूर्णिमा की पूजा के लिए निम्नलिखित विधि का पालन कर सकते हैं:
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स्नान: पूजा की शुरुआत स्नान से होती है। कार्तिक मास की पूर्णिमा के दिन ब्रह्मा मुहूर्त में स्नान करना शुभ माना जाता है। गंगा, सरस्वती, यमुना, या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
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पूजा स्थल: एक शुभ मुहूर्त में पूजा स्थल तैयार करें और उसे सजाएं। पूजा स्थल पर गंगा जल, श्रृंगार सामग्री, और पूजा के लिए आवश्यक सामग्री रखें।
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मूर्तियाँ और चित्र: भगवान शिव, देवी लक्ष्मी, और भगवान सूर्य की मूर्तियाँ या उनके चित्र को सजाकर रखें।
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पूजा विधि:
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‘ॐ नमः शिवाय’, ‘ॐ ह्रीं लक्ष्म्यै नमः’, और ‘ॐ सूर्याय नमः’ मंत्रों का जाप करें।
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दीपाराधन करें और पुष्प, धूप, और नैवेद्य से भगवान की पूजा करें।
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विधि-विधान से अर्घ्य और प्रदक्षिणा करें।
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व्रत: कार्तिक पूर्णिमा का व्रत रखें और दिनभर विशेष पूजा अर्चना करें। व्रत के दौरान नमक और मांसाहारी भोजन से बचें।
इस पावन दिन पर यह पूजा और अर्चना विधि अपनाकर हम सभी भगवानों की कृपा पा सकते हैं और अपने जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि को आमंत्रित कर सकते हैं।
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