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Pitru Paksh 2023 : श्राद्ध में क्या है मान्यता कौवे को खाना खिलाने के पीछे

Pitru Paksh 2023 : पितृ पक्ष में हिंदू अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा भी है।

नई दिल्ली ,04 अक्टूबर 2023 : पितृ पक्ष हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की अमावस्या तक चलता है। इस दौरान, हिंदू अपने मृत पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा भी है।

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने के पीछे के मान्यताओं

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने के पीछे कई मान्यताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार, कौवे को पितरों का दूत माना जाता है। जब कौवा अर्पित किए गए भोजन को ग्रहण करता है, तो माना जाता है कि वह उस भोजन को सीधे पितरों तक पहुंचा देता है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, कौवे को अमृत का स्वाद चखने वाला माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इंद्र देव के पुत्र जयंत ने कौवे का रूप धारण किया था और माता सीता के पैर में चोंच मार दी थी। भगवान राम ने तिनके का बाण चलाकर जयंत की आंख फोड़ दी थी। जयंत ने अपने किए की माफी मांगी, तो भगवान राम ने उसे वरदान दिया कि पितृ पक्ष में कौए को दिया गया भोजन पितरों को प्राप्त होगा।

पितृ पक्ष में कौए को क्या खिलाना चाहिए?

पितृ पक्ष में कौए को भोजन के रूप में चावल, रोटी, सब्जियां, दही, मिठाई, और पानी आदि दिया जा सकता है। ध्यान रखें कि भोजन ताजा और साफ होना चाहिए।

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने का महत्व

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने का महत्व निम्नलिखित है:

  • यह एक प्रकार का दान है, जो हमारे पूर्वजों के लिए किया जाता है।

  • इससे हमारे पूर्वज प्रसन्न होते हैं और हमें आशीर्वाद देते हैं।

  • यह हमारे और हमारे पूर्वजों के बीच के संबंध को मजबूत करता है।

पितृ पक्ष में कौए को भोजन कराने की परंपरा एक प्राचीन और पौराणिक परंपरा है। इस परंपरा का पालन करके हम अपने पूर्वजों को याद कर सकते हैं और उन्हें सम्मान दे सकते हैं।

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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