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Narasimha Jayanti Mantra: नरसिंह जयंती के दिन इन मंत्रों का करें जाप, पूरी होगी हर मनोकामना

विष्णु भगवान के कई अवतार हैं, उनमें से एक है नरसिंह अवतार। आज नरसिंह जयंती के दिन आपको इनकी पूजा अर्चना करके उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए।

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क।21May 2024। नरसिंह जयंती का काफी महत्व है आज के दिन नरसिंह भगवान की पूजा अर्चना करके उन्हें प्रसन्न किया जाता है। कहते हैं अगर आज के दिन भगवान को चंदन का लेप लगाया जाए तो उनकी कृपा आप पर बनी रहती है। आप उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनके मंत्रों का भी जब कर सकते हैं।

नरसिंह जयंती का महत्व

भगवान नरसिंह विष्णु भगवान के चौथों अवतार हैं। इन्होंने हिरणकश्यप को उसके कर्म का फल देने के लिए ये अवतार लिया। धार्मिक ग्रंथों में भगवान नृसिंह की महानता और नरसिंह जयंती के महत्व का विस्तार से वर्णन किया गया है। कहते हैं जो भक्त देवताओं की पूजा करते हैं और नरसिंह जयंती पर व्रत रखते हैं, वे अपने अपने जीवन में आगे बढ़ते हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करते हैं। और अपने जीवन से नकारात्मक शक्तियों से छुटकारा पा सकते हैं। आज के दिन नरसिंह भगवान की पूजा अर्चना करने से आप बड़ी सी बड़ी बीमारी से भी सुरक्षित रह सकते हैं। वे कई बड़ी बीमारियों से भी सुरक्षित रहते है।

पूजा विधि

आज के दिन आप ब्रह्म मुहूर्त में उठकर,स्वच्छ वस्त्र धारण करके व्रत का संकल्प लेते हैं और पूरे दिन व्रत रखते हैं। इस व्रत का पालन करें जो नरसिंह जयंती पर सूर्योदय से शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय पर समाप्त होता है। आप भगवान को नारियल, मिठाई, फल, केसर, फूल और कुमकुम चढ़ाएं। और भगवान की आरती करें और आरती को पूरे घर में दिखाएं। मान्यता है कि नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने से भक्त के सारे दुख दूर हो जाते है। साथ ही नरसिंह मंत्र का जाप भी किया जाता है।

इन मंत्रों का करें जाप

नृसिंह गायत्री :

”ॐ उग्र नृसिंहाय विद्महे, वज्र-नखाय धीमहि। तन्नो नृसिंह: प्रचोदयात्।

नृसिंह गायत्री :

”ॐ वज्र-नखाय विद्महे, तीक्ष्ण-द्रंष्टाय धीमहि। तन्नो नारसिंह: प्रचोदयात्।।”

अष्टाक्षर नृसिंह : ”जय-जय श्रीनृसिंह”

आठ अक्षरी लक्ष्मी नृसिंह मंत्र: ”ॐ श्री लक्ष्मी-नृसिंहाय”

दस अक्षरी नृसिंह मन्त्र: ”ॐ क्ष्रौं महा-नृसिंहाय नम:”

तेरह अक्षरी नृसिंह मन्त्र: ”ॐ क्ष्रौं नमो भगवते नरसिंहाय”

एकाक्षर नृसिंह मंत्र : ”क्ष्रौं”

त्र्यक्षरी नृसिंह मंत्र : ”ॐ क्ष्रौं ॐ”

षडक्षर नृसिंह मंत्र : ”आं ह्रीं क्ष्रौं क्रौं हुं फट्”

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डिसक्लेमर

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है, और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगकर्ता की होगी।

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