Sankashti Chaturthi mantra: संकष्टी चतुर्थी के दिन गणेश भगवान के इन मंत्रों का करें जाप, बन जाएंगे हर काम

संकष्टी चतुर्थी का दिन गणेश भगवान को समर्पित होता है इस दिन उनकी पूजा अर्चना करने का बहुत महत्व होता हैं।
Mantra of Sankashti Chaturthi
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नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। 28 February 2024। फाल्गुल माह में को शुरुआत हो चुकी है।और हिन्दू धर्म के अनुसार इस महा में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी का बहुत महत्व होता है। इस दिन भगवान गणेश के पूजा करके मनचाहा फल प्राप्त कर सकते हैं।

संकष्टी चतुर्थी का महत्व

संकष्टी चतुर्थी का व्रत सुख-समृद्धि का द्वार खोलता है। इस व्रत को करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। यह व्रत संतान प्राप्ति के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है। इसीलिए यह व्रत स्त्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। वहीं, इस व्रत को करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती हैं।

पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी का त्योहार इस बार 28 फरवारी यानी आज मनाया जाएगा। इस दिन महिलाएं अपने संतान की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं। और गणेश भगवान से अपने घर परिवार की शांति की कामना करती हैं। इस व्रत को रखने का काफी कठोर नियम है। इस दिन महिलाएं नीरा जल व्रत रखती है। और शाम को चंद्र भगवान की पूजा करने के बाद ही कुछ खाती है। आज के दिन खाने-पीने का भी कुछ अलग नियम है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भूमि के अंदर होने वाले कंद मूल का सेवन नहीं करना चाहिए इसलिए मूली, प्याज, गाजर, चुकंदर आदि। इस दिन भगवान गणेश को फल फूल के साथ तिल्ली भी चढ़ाया जाता है।

इन मंत्रों का करें जाप

॥ ॐ एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि तन्नो दन्तिः प्रचोदयात् ॥

'ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।'

इदं दुर्वादलं ऊं गं गणपतये नमः'

ॐ वक्रतुण्डैक दंष्ट्राय क्लीं ह्रीं श्रीं गं गणपते वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा'

ॐ श्रीं गं सौभ्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं में वशमानय स्वाहा।

ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरु गणेश।

ग्लौम गणपति, ऋद्धि पति, सिद्धि पति. करो दूर क्लेश ।।

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