Mangalwar Mantra: संकटमोचन हनुमान जी के इन मंत्रों के जाप से जागता है भाग्य

मंगलवार का दिन हनुमान जी को समर्पित है। हनुमान जी को संकटमोचन भी कहा जाता है क्योंकि वो सबके संकट हर लेते हैं।
Mantra of Sankat Mochana Hanuman
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नई दिल्ली रफ्तार डेस्क।12 March 2024। भगवान हनुमान जी का एक नाम संकटमोचन भी है, जो बहुत शक्तिशाली नाम है। इस नाम से ही कई सारे कष्ट कट जाते है। वहीं भगवान के कुछ ऐसे मंत्र हैं, जिनके जाप से आपका भाग्य परिवर्तन होता है।

इस प्रकार करें भगवान की पूजा

हनुमान जी की पूजा-अर्चना करने के लिए आपको प्रातः काल उठना चाहिए और मंदिर जाना चाहिए। मंदिर जाकर आप व्रत का संकल्प ले और संकटमोचन हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल और चमेली का तेल अर्पित करें। इसके बाद गुड़ और चने का भोग लगाना चाहिए। इस दिन सुंदरकाण्ड या हनुमान चालीसा का पाठ करना बहुत फलदाई है। वहीं, अपनी पूजा खत्म करके आप सबको प्रसाद जरूर दें।

हनुमान जी को प्रसन्न करने का अचूक उपाय

हिंदू धर्म में भगवान को तेल चढ़ाने का अलग-अलग नियम बताया गया है। वहीं भगवान को अलग-अलग प्रकार की वस्तुएं अथवा फूल चढ़ाने का भी नियम है। वहीं, मंगलवार को हनुमान जी पर चमेली का तेल चढ़ाने से भगवान जल्दी प्रसन्न होते हैं। भगवान हनुमान जी के समीप चमेली का दिया जलाना काफी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से आपके ऊपर भूत प्रेत का साया नहीं रहता और घर में सुख शांति बनी रहती है।

मंगलवार को भूलकर भी न करें यह काम

मंगलवार के दिन नमक खाने से बचना चाहिए क्योंकि नमक का सेवन मंगलवार को करने से आपके कार्यो में बाधा आती है।

मंगलवार को ऐसा कोई कार्य न करें जिसमें शुक्र और शनि का सम्बन्ध हो। इस दिन काले रंग के कपड़े पहनने से बचना चाहिए।

मंगलवार को आप कभी किसी का कर्जा न ले और किसी को कोई पैसे भी न दें क्योंकि ऐसा करने से आपकी आर्थिक स्थिति कमजोर हो जाती है।

इन मंत्रों का करें जाप

ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय अक्षिशूलपक्षशूल शिरोऽभ्यन्तर

शूलपित्तशूलब्रह्मराक्षसशूलपिशाचकुलच्छेदनं निवारय निवारय स्वाहा।

ॐ नमो हनुमते आवेशाय आवेशाय स्वाहा।

ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोग हराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।

आदिदेव नमस्तुभ्यं सप्तसप्ते दिवाकर।त्वं रवे तारय स्वास्मानस्मात्संसार सागरात।।

महाबलाय वीराय चिरंजिवीन उद्दते।हारिणे वज्र देहाय चोलंग्घितमहाव्यये।।

ॐ हं हनुमंते नम:

ॐ हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट।

ॐ पूर्वकपिमुखाय पच्चमुख हनुमते टं टं टं टं टं सकल शत्रु सहंरणाय स्वाहा।

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