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Sunday, March 22, 2026
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Ahoi Ashtami Mantra: आज करें अहोई अष्टमी का व्रत, संतान पर बनी रहेंगी माता पार्वती की कृपा

अहोई अष्टमी का व्रत बहुत ही खास होता है माताएं अपनी संतान की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। संतान की सुख समृद्धि के लिए हर मां कई प्रकार के व्रत रखते हैं जिसमें शामिल अहोई व्रत भी है। अहोई व्रत बहुत ही खास और अलग प्रकार का होता है। इस दौरान माताएं तारों की पूजा करती हैं और अपने संतान के लिए लंबी आयु की कामना करती हैं आज के दिन माता पार्वती और भोलेनाथ समय गणेश भगवान की पूजा की जाती है।इसके अलावा, जिनकी संतान दीर्घायु ना होती हो या गर्भ में ही नष्ट हो जाती हो उनके लिए ये व्रत शुभकारी होता है। इस दिन विशेष प्रयोग करने से संतान की उन्नति और कल्याण भी होता है।

पूजा विधि 

अहोई अष्टमी पर सुबह स्नान कर अहोई माता की पूजा का संकल्प लें

 फिर माता की आकृति गेरू या लाल रंग से दीवार पर बनाएं। सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर पूजन आरंभ करें. फिर, पूजा की सामग्री में चांदी या सफेद धातु की अहोई, चांदी की मोती की माला, जल से भरा कलश, दूध, भात, हल्वा, फूल और दीपक आदि रखें।

अहोई व्रत की खास बातें 

अहोई के दिन अहोई माता को रोली, फूल, दीपक अर्पित करें। फूल, दीपक से पूजा करें, माता को दूध-भात अर्पित करें। फिर, हाथ में गेहूं के 7 दाने और कुछ दक्षिणा लेकर अहोई माता की कथा सुनें। आज के दिन कथा सुनना बहुत जरूरी होता है कथा में आपको कई सारी चीज का पता लगता है। इस दिन महिलाएं शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और तारे देखने पर व्रत खोलती हैं इसलिए रात में चंद्रमा को अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करें।

मंत्रों का का करें जाप

ॐ देवी महागौर्यै नमः..

स्तोत्रणानेन या: स्तुत्वा समाप्ति दिवसे शिवाम्.

नमन्ति परया भक्त्या ता लभन्ति हरिं पतिम्..

इह कान्तसुखं भुक्त्वा पतिं प्राप्य परात्परम्.

दिव्यं स्यन्दनमारुह्य यान्त्यन्ते कृष्णसंनिधिम्..

शक्तिस्वरूपे सर्वेषां सर्वाधारे गुणाश्रये

सदा शंकरयुक्ते च पतिं देहि नमोsस्तु ते..

सृष्टिस्थित्यन्त रूपेण सृष्टिस्थित्यन्त रूपिणी.

सृष्टिस्थियन्त बीजानां बीजरूपे नमोsस्तु ते..

हे गौरि पतिमर्मज्ञे पतिव्रतपरायणे.

पतिव्रते पतिरते पतिं देहि नमोsस्तु ते..

सर्वमंगल मंगल्ये सर्वमंगल संयुते.

सर्वमंगल बीजे च नमस्ते सर्वमंगले..

सर्वप्रिये सर्वबीजे सर्व अशुभ विनाशिनी.

सर्वेशे सर्वजनके नमस्ते शंकरप्रिये..

परमात्मस्वरूपे च नित्यरूपे सनातनि.

साकारे च निराकारे सर्वरूपे नमोsस्तु ते..

क्षुत् तृष्णेच्छा दया श्रद्धा निद्रा तन्द्रा स्मृति: क्षमा.

एतास्तव कला: सर्वा: नारायणि नमोsस्तु ते

लज्जा मेधा तुष्टि पुष्टि शान्ति संपत्ति वृद्धय:.

एतास्त्व कला: सर्वा: सर्वरूपे नमोsस्तु ते..

दृष्टादृष्ट स्वरूपे च तयोर्बीज फलप्रदे .

सर्वानिर्वचनीये च महामाये नमोsस्तु ते..

शिवे शंकर सौभाग्ययुक्ते सौभाग्यदायिनि.

हरिं कान्तं च सौभाग्यं देहि देवी नमोsस्तु ते..

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डिसक्लेमर

 

इस लेख में प्रस्तुत किया गया अंश किसी भी जानकारी/सामग्री/गणना की पूरी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता। यह जानकारियां विभिन्न स्रोतों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/प्रामाणिकताओं/धार्मिक प्रतिष्ठानों/धर्मग्रंथों से संग्रहित की गई हैं। हमारा मुख्य उद्देश्य सिर्फ सूचना प्रस्तुत करना है,और उपयोगकर्ता को इसे सूचना के रूप में ही समझना चाहिए। इसके अतिरिक्त, इसका कोई भी उपयोग करने की जिम्मेदारी सिर्फ उपयोगक की

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