नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। हिन्दू धर्म में देखा जाता है कि, किसी भी शुभ कार्य से पहले गणेश जी की पूजा (Lord Ganesha Puja) की जाती है, ताकि वह कार्य बिना किसी बाधा के पूर्ण हो सके। इसलिए जब भी कोई शुभ कार्य किया जाता है, तो उसे श्रीगणेश करना कहा जाता है। इसके साथ ही गणेश जीबुद्धि और समृद्धि के देवता भी कहलाते है। चलिए आज इनके बारे में कुछ खास बातें आपको बताते हैं।
गणेश भगवन का स्वरुप
किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से की जाती है, क्योंकि वे सभी बाधाओं को दूर करने वाले माने जाते हैं। उनके स्वरूप के बारे में बताए तो, गणेश जी का सिर हाथी का होता है, जो बुद्धि, विवेक और दूरदर्शिता का प्रतीक है। हाथी के बड़े कान सुनने की क्षमता और ध्यान का प्रतीक माने जाते हैं।उनके एक दांत का होना (एकदंत) इच्छाओं और अहंकार को त्यागने का संदेश देता है। उनके चार भुजाएँ होती हैं। प्रत्येक हाथ में वे अलग-अलग वस्तुएँ रखते हैं, जैसे पाश (पकड़), अंकुश (काबू), मोदक (भोग) और आशीर्वाद की मुद्रा। यह उनके शारीरिक और आध्यात्मिक शक्तियों का प्रतीक है।उनका बड़ा पेट समस्त जगत को अपने में समेट लेने की क्षमता और धैर्य का प्रतीक है।
गणेश भगवान का परिवार
भगवान गणेश के पिता भगवान शिव और माता देवी पार्वती हैं। उनका एक भाई भी है, जिनका नाम कार्तिकेय है। परिवार के साथ उनका संबंध प्रेम और आदर्श का प्रतीक माना जाता है। गणेश जी की पत्नी के रूप में ऋद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (सफलता) का वर्णन मिलता है। उनके दो पुत्रों के नाम शुभ और लाभ बताए जाते हैं, जो जीवन में सुख और लाभ के प्रतीक हैं।
गणेश भगवान का वाहन
जहां अन्य देवी-देवताओं के विशाल और ताकतवर वाहन मिलते हैं, वहीं गणेश जी एक छोटे-से चूहे की सवारी करते हैं। यह भी उनके दया भाव को दर्शाता है। उन्हें एक छोटे-से चूहे को ही इतना ताकतवर बना दिया कि वह उनका भार उठा सके। साथ ही उनका एक मूषक को अपनी सवारी के रूप में चुनना यह भी दर्शाता है कि कभी भी किसी को कमजोर या तुच्छ नहीं समझना चाहिए।
गणेश भगवान के अनेको नाम
भगवान गणेश के कई नाम हैं, जैसे गणपति, विनायक, गजानन, एकदंत, लंबोदर और विघ्नहर्ता। हर नाम उनके गुणों और विशेषताओं को दर्शाता है। गणेश जी की शक्तियों में बुद्धि, विवेक, ज्ञान और सफलता प्रदान करना शामिल है। वे अपने भक्तों की हर समस्या को दूर करते हैं और उन्हें सही मार्ग दिखाते हैं। इसलिए विद्यार्थी, व्यापारी और हर वर्ग के लोग उनकी विशेष पूजा करते हैं।




