नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। ब्रजभूमि में होली सिर्फ एक दिन का पर्व नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण की लीला, प्रेम और परंपरा का नौ दिनों तक चलने वाला अद्भुत उत्सव है। जैसे ही फाल्गुन मास की आहट होती है, Mathura और Vrindavan की गलियां गुलाल, भजनों और श्रद्धा से सराबोर हो उठती हैं। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस अनोखी होली के साक्षी बनने पहुंचते हैं। वर्ष 2026 में ब्रज की होली 25 फरवरी से शुरू होकर 5 मार्च तक धूमधाम से मनाई जाएगी।
25 फरवरी: बरसाना में लड्डू होली से शुरुआत
ब्रज की होली का श्रीगणेश 25 फरवरी 2026 को Barsana स्थित श्रीजी मंदिर में लड्डू होली से होगा। यहां पुजारी और भक्त एक-दूसरे पर लड्डू बरसाकर उत्सव की शुरुआत करते हैं। जयकारों और भजनों के बीच यह दृश्य बेहद अलौकिक लगता है।
26-27 फरवरी: लट्ठमार होली की धूम
26 फरवरी को बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लट्ठमार होली खेली जाएगी। मान्यता है कि नंदगांव के गोप राधा रानी को रंग लगाने आते थे और सखियां उन्हें लाठियों से खदेड़ती थीं। इसी परंपरा की झलक आज भी दिखती है। अगले दिन 27 फरवरी को Nandgaon में लट्ठमार होली का रंग चढ़ेगा। ढोल-मंजीरों और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से पूरा गांव गूंज उठेगा।
28 फरवरी: वृंदावन की फूलों वाली होली
28 फरवरी को Banke Bihari Temple में फूलों की होली खेली जाएगी। यहां रंगों की जगह पुष्पों की वर्षा होती है। मंदिर परिसर सुगंधित फूलों से भर उठता है। इस दिन रंगभरी एकादशी का भी विशेष महत्व रहता है।
1-2 मार्च: गोकुल की छड़ी मार और रामन रेती होली
1 मार्च को Gokul में छड़ी मार होली का आयोजन होगा, जबकि 2 मार्च को रामन रेती में भक्ति और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ होली खेली जाएगी। यहां श्रद्धालु भजन-कीर्तन के बीच उत्सव का आनंद लेते हैं।
3-4 मार्च: होलिका दहन और धुलेंडी
3 मार्च 2026 को फाल्गुन पूर्णिमा की रात होलिका दहन किया जाएगा, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। 4 मार्च को धुलेंडी पर पूरे ब्रज में रंगों की बौछार होगी। गलियां, मंदिर और चौक- हर जगह गुलाल की धूम दिखाई देगी।
5 मार्च: दाऊजी का हुरंगा
उत्सव का समापन 5 मार्च को Baldev में दाऊजी के हुरंगा से होगा। यहां महिलाओं द्वारा पुरुषों पर रंग और कपड़े फाड़ने की परंपरा देखने को मिलती है, जो ब्रज की अनोखी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। ब्रज की होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि आस्था और आनंद का महासंगम है। यहां हर दिन की अपनी अलग पहचान और परंपरा है, जो इसे दुनिया की सबसे खास होली बनाती है।





