back to top
27.1 C
New Delhi
Tuesday, March 17, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

Ambubachi Mela: हर साल कामाख्या देवी मंदिर में क्यों लगता है Ambubachi Mela, जानिए क्या है इसका महत्व

Ambubachi Mela: यह मंदिर अन्य शक्तिपीठों से थोड़ा अलग है क्योंकि यह स्थान तंत्र साधना के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। कामाख्या मंदिर में मां की पूजा अर्चना की जाती है।

नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क। Ambubachi Mela: भारत की पवित्र भूमि के विभिन्न भागों में 51 शक्तिपीठ हैं,जिनके दर्शन एवं पूजन से विभिन्न मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। वहां एक शक्तिपीठ है जिसे महा शक्तिपीठ, “देवी कामाख्या का मंदिर” कहा जाता है। यह मंदिर असम के गुवाहाटी में एक पहाड़ी पर बनाया गया है। यह मंदिर अन्य शक्तिपीठों से थोड़ा अलग है क्योंकि यह स्थान तंत्र साधना के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। कामाख्या मंदिर में मां की पूजा अर्चना की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर विलाप कर रहे थे तो भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के मृत्यु शरीर को छिन भिन कर दिया । माता सती का योनि अंग यहीं गिरा था इस कारण इस मंदिर में मां के योनी रूप की पूजा की जाती है।

क्या है अम्बुबाची पर्व

अंबुबाची शब्द दो शब्दों अंबु और बाची से मिलकर बना है, जहां अंबु का मतलब पानी और बच्ची का मतलब झरना होता है। यह शब्द महिलाओं की ताकत और उनके बच्चे पैदा करने की क्षमता को दर्शाता है। हर साल जून में मां कमाहिया के मौसम में यह मेला लगता है। अंबुबाची योग उत्सव के दौरान मां भगवती के मंदिर के दरवाजे स्वत: बंद हो जाते हैं और उनके दर्शन भी वर्जित होते हैं। तीन दिन बाद रजस्वला मां भगवती की विशेष पूजा और साधना समाप्त होती है। चौथे दिन ब्रह्म मुहूर्त में देवी को स्नान कराने के बाद ही मंदिर भक्तों के दर्शन के लिए खुलता है।

योनि भाग की होती हैा पूजा

इस मंदिर में कोई देवी मूर्ति नहीं है और यहां चट्टान के रूप में विराजमान देवी के योनि भाग की ही पूजा की जाती है, क्योंकि माता सती का योनि भाग यहां गिरा था। माँ कामाख्या साक्षात यहीं नीलमणि योनि में निवास करती हैं। जो कोई भी इस शिला की पूजा, दर्शन और स्पर्श करता है उसे मां भगवती के साथ-साथ देवी की कृपा और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस शक्तिपीठ में 64 योगिनियों और 10 महाविद्याओं के साथ देवी मां की पूजा की जाती है। भुवनेश्वरी, भगरा, छिन्न मस्तिका, काली, तारा, मातंगी, कमला, सरस्वती, धूमावती और भैरवी एक ही स्थान पर विराजमान हैं। प्रत्येक शक्ति पीठ का अपना-अपना अर्थ होता है, लेकिन कामक्या शक्ति पीठ को अन्य शक्ति पीठों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। कालिका पुराण के अनुसार, कामदेव को इसी स्थान पर शिव के त्रिनेत्र द्वारा जलाकर भस्म कर दिया गया था और उन्हें अपने मूल रूप में लौटने से लाभ हुआ था।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

West Bengal Election 2026: क्या चौथी बार सत्ता में लौटेंगी ममता बनर्जी या BJP बदलेगी 15 साल का खेल?

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 को...

Nora Fatehi के नए गाने पर मचा बवाल, अब सिंगर Armaan Malik ने भी किया रिएक्ट

नई दिल्ली रफ्तार डेस्क। नोरा फतेही (Nora Fatehi) इस...

बिहार में राज्यसभा चुनाव के नतीजों के बाद ‘INDIA’ में रार, तेजस्वी यादव पर भड़के पप्पू यादव

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सोमवार 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव...

27 मार्च को JDU राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए होगा चुनाव, जानिए किसके नाम पर लग सकती है मुहर

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने राष्ट्रीय...