back to top
25.1 C
New Delhi
Monday, March 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

आमलकी एकादशी 2026: पापों से मुक्ति और विष्णु कृपा का पर्व, जानें फरवरी की सही तिथि और पूजा तरीका

26 फरवरी 2026 को पड़ने वाली आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष और भगवान विष्णु की पूजा करने से पापों से मुक्ति, धन-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मिलता है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। सनातन धर्म में एकादशी व्रत को अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। हर माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष में दो एकादशी आती हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना अलग धार्मिक महत्व होता है। फरवरी 2026 में पड़ने वाली आमलकी एकादशी विशेष रूप से पापों से मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए जानी जाती है। इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा का विधान है, क्योंकि मान्यता है कि आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु स्वयं आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं।

लोकल 18 से बातचीत में काशी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित संजय उपाध्याय ने बताया कि 26 फरवरी 2026, गुरुवार को फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर आमलकी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, आमलकी एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में संचित सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह व्रत मोक्ष प्रदान करने वाला माना गया है। आंवले का वृक्ष भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा करने से विष्णु पूजन का पूर्ण फल प्राप्त होता है। साथ ही माता लक्ष्मी की कृपा से आर्थिक संकट भी दूर होते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

पंडित संजय उपाध्याय के अनुसार, आमलकी एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लेना चाहिए।

पूजा का शुभ समय:

सुबह 6:15 बजे से 9:40 बजे तक

इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें आंवले का फल अवश्य अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा

शास्त्रों में वर्णन है कि इस व्रत के प्रभाव से दैवत्व की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक व्याघ्र (बाघ) को इसी व्रत के पुण्य प्रभाव से मनुष्य योनि प्राप्त हुई थी। यही कारण है कि आमलकी एकादशी को अत्यंत प्रभावशाली और फलदायी माना गया है।

रंगभरी एकादशी और काशी की परंपरा

आमलकी एकादशी को काशी में रंगभरी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन बाबा विश्वनाथ माता गौरा का गवना कराते हैं। इसके साथ ही काशी में रंगोत्सव की शुरुआत हो जाती है, जो होली तक चलता है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरे उल्लास और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

Advertisementspot_img

Also Read:

spot_img

Latest Stories

Amitabh Bachchan ने सोशल मीडिया पर किया ऐसा ट्वीट, फैंस में मचा तहलका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल...

बंगाल से राज्यसभा की दौड़ में नई एंट्री, ममता बनर्जी ने किया नॉमिनेट, आखिर कौन हैं कोयल मल्लिक?

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की...

The Kerala Story 2 Day 1 Collection: कंट्रोवर्सी के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत ओपनिंग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोर्ट केस और सियासी विवादों के...

तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026...