नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक तापमान चरम पर है। रोहतास जिले में काराकाट विधानसभा क्षेत्र में संभावित उम्मीदवार जनता के बीच सक्रिय हो गए हैं, मतदाताओं से सीधे संपर्क कर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं। चुनावी हलचल ने क्षेत्र का माहौल रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बना दिया है।
काराकाट सीट वर्तमान में CPI(ML)(L) के कब्जे में है, जो महागठबंधन का हिस्सा है। इस बार चुनावी मुकाबला काफी कड़ा होने वाला है, क्योंकि प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी भी पहली बार इस क्षेत्र में चुनाव में उतरेगी, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई है।
काराकाट के बारे में जानें
काराकाट, रोहतास जिले में स्थित एक सामान्य निर्वाचन क्षेत्र है, जो मुख्यतः ग्रामीण इलाका माना जाता है। यहां लगभग 17.61% अनुसूचित जाति और 8.6% मुस्लिम मतदाता हैं, जबकि 11.13% मतदाता शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। राजनीतिक रूप से, इस क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा और वामपंथी दलों का प्रभाव देखा जाता है। ऐतिहासिक दृष्टि से, काराकाट मौर्य साम्राज्य, गुप्त साम्राज्य और पाल वंश के अधीन रहा है।
काराकाट सीट का चुनावी इतिहास
काराकाट निर्वाचन क्षेत्र की स्थापना 1967 में हुई थी। अब तक यहां हुए 14 विधानसभा चुनावों में भाकपा (माले) ने सबसे अधिक 4 बार जीत दर्ज की है। इसके अलावा, संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, कांग्रेस, जनता पार्टी और जनता दल ने दो-दो बार, जबकि JDU और RJD ने एक-एक बार इस सीट से जीत हासिल की है।
काराकाट विधानसभा चुनावों का इतिहास:
⦁ 2020: CPI(ML)(L) के अरुण सिंह जीते।
⦁ 2015: आरजेडी के संजय कुमार सिंह ने जीत दर्ज की।
⦁ 2010: जेडीयू के राजेश्वर राज विजयी रहे।
⦁ 2005 (फरवरी और अक्टूबर): CPI(ML)(L) के अरुण सिंह लगातार जीत हासिल की।
⦁ 1995 और 1990: जनता दल के तुलसी सिंह विजयी रहे।
⦁ 1985: कांग्रेस की शशिरानी मिश्रा जीतीं।
⦁ 1980: NP(SC) के टिकट पर तुलसी सिंह विधायक बने।
यह चुनावी इतिहास दिखाता है कि काराकाट में विभिन्न दलों का प्रभाव और प्रतिस्पर्धा समय-समय पर बदलती रही है।
इस सीट पर पहली जीत की तलाश में BJP
सीपीआई(एमएल)(एल) के अरुण सिंह कुशवाहा चार बार से काराकाट के विधायक हैं। उन्होंने 2020 में भाजपा के राजेश्वर राज को 18,189 मतों से हराया था। हालांकि, लोकसभा चुनाव 2024 में इस सीट से उनके पक्ष में केवल 6,599 मतों की बढ़त रही, जिससे भाजपा को यह उम्मीद जगी है कि यदि वह एनडीए सहयोगियों को एकजुट कर पाती है, तो काराकाट में अपनी पहली जीत दर्ज कर सकती है।




