नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में वक्फ संशोधन विधेयक पर बवाल जारी है। विपक्ष इसे लेकर सड़कों पर उतर चुका है, वहीं भाजपा इसे हिंदू वोटरों को एकजुट करने के मौके के तौर पर देख रही है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा और गर्माने वाला है।
बिहार में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर बढ़ा विवाद
वक्फ संशोधन विधेयक पर पूरे देश में बहस छिड़ी हुई है। बिहार में इसको लेकर जोरदार विरोध हो रहा है। बीते बुधवार 26 मार्च, 2025 को राजधानी पटना के गर्दनीबाग में कई बड़े मुस्लिम संगठनों ने इस बिल के खिलाफ धरना दिया। इस प्रदर्शन में राष्ट्रीय जनता दल RJD के नेता लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के अलावा प्रशांत किशोर PK भी शामिल हुए। बिल को लेकर विधानसभा में भी हंगामा हुआ। विपक्ष इसे मुसलमानों के खिलाफ बता रहा है और सरकार से इसे वापस लेने की मांग कर रहा है।
क्या मुस्लिम वोटर नीतीश कुमार से नाराज हैं?
नीतीश कुमार को अब तक मुस्लिम वोटरों का समर्थन मिलता रहा है, लेकिन इस बार माहौल बदला हुआ नजर आ रहा है। हाल ही में मुख्यमंत्री आवास में आयोजित इफ्तार पार्टी में कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध जताया था। 2020 के विधानसभा चुनाव में जदयू ने 11 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन कोई भी जीत नहीं पाया था। बिहार विधानसभा में फिलहाल 19 मुस्लिम विधायक हैं। प्रशांत किशोर का दावा है कि उनकी पार्टी 40 मुस्लिम उम्मीदवार उतारेगी, जिससे मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लग सकती है।
किसे होगा फायदा?
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि इस विवाद का सबसे बड़ा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मिल सकता है। वरिष्ठ पत्रकार अरुण पांडेय के अनुसार, “बीजेपी की रणनीति हिंदू वोटरों को एकजुट करने की है और इस मुद्दे से उसे इसमें फायदा मिल सकता है। विपक्ष को मुस्लिम वोट तो मिल सकते हैं, लेकिन इससे हिंदू वोटरों का समर्थन कमजोर पड़ सकता है। बीजेपी इस स्थिति का पूरा फायदा उठाने के मूड में दिख रही है। अब देखना होगा कि वक्फ संशोधन विधेयक पर जारी विवाद चुनाव में किसके पक्ष में जाता है और कौन इसका राजनीतिक लाभ उठाने में सफल होता है।





