नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार में नई सरकार के शपथ ग्रहण के बाद राजनीतिक घमासान शुरू हो गया है। 20 नवंबर को 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को शामिल किए जाने पर विपक्ष ने परिवारवाद का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है।
विधायक न होते हुए भी मंत्री, 6 महीने में सदन का सदस्य बनना होगा
कंप्यूटर इंजीनियरिंग में ग्रेजुएट दीपक प्रकाश न तो विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य। इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाया गया है। नियम के अनुसार अब उन्हें 6 महीने के भीतर किसी सदन का सदस्य बनना होगा, वरना मंत्री पद छोड़ना पड़ेगा।
“मुझे पता नहीं था… पापा ही बताएंगे” – दीपक प्रकाश
शपथ ग्रहण के बाद मीडिया से बातचीत में दीपक ने कहा, “मुझे पता ही नहीं था कि मैं मंत्री बनने वाला हूं। शपथ ग्रहण के कुछ समय पहले ही जानकारी मिली। मेरा नाम क्यों तय हुआ? इस बारे में तो पापा ही बता पाएंगे। उनके इस बयान ने विपक्ष को और ज्यादा हमलावर होने का मौका दे दिया है।
RJD का हमला: जारी की ‘वंशवाद वाले नेताओं’ की लिस्ट
RJD ने प्रेस नोट जारी कर NDA सरकार पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। जो लिस्ट जारी की गई, उसमें ये प्रमुख नाम शामिल हैं जीतन राम मांझी, शकुनी चौधरी, उपेंद्र कुशवाहा, दिग्विजय सिंह कैप्टन जय नारायण निषाद कुल 10 नाम बताए गए। RJD का कहना है कि NDA उसी परिवारवाद की राजनीति का हिस्सा बन चुकी है, जिसका विरोध करने की बात वह हमेशा करती रही है। चुनाव से पहले NDA गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान देखने को मिली थी। उपेंद्र कुशवाहा भी नाराज बताए जा रहे थे और उन्होंने सोशल मीडिया पर भी संकेत दिए थे। विश्लेषकों का मानना है कि बेटे को मंत्री बनाकर उनकी नाराजगी दूर करने की कोशिश की गई है और जल्द ही दीपक को एमएलसी बनाया जाएगा। दीपक की मां स्नेहलता कुशवाहा हाल ही में सासाराम सीट से विधायक चुनी गईं। माना जा रहा था कि उन्हें मंत्री बनाया जाएगा, लेकिन पद बेटे को मिल गया। इसी को लेकर विपक्ष और सोशल मीडिया पर चर्चाएँ तेज हैं।





