नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क । बिहार की सियासी फिजाओं में 2025 के विधानसभा चुनाव की आहट साफ सुनाई देने लगी है। जिसमें दल-बदल, रणनीति और रैलियों का दौर तेज हो गया है। सीमांचल की अहम सीट ठाकुरगंज में भी चुनावी तापमान चढ़ने लगा है। 2020 में RJD के सऊद आलम ने धमाकेदार जीत दर्ज कर सियासी पिच पर अपनी पकड़ मजबूत की थी, लेकिन इस बार हालात बदले-बदले नजर आ रहे हैं।
जहां एक ओर नीतीश सरकार जनता को लुभाने के लिए लोकलुभावन योजनाएं पेश कर रही है, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) और जन सुराज जैसे नए राजनीतिक चेहरे भी चुनावी रणभूमि में ताल ठोक रहे हैं।
2020 में सऊद आलम की प्रचंड जीत
पिछले चुनाव की बात करें तो ठाकुरगंज सीट पर RJD के सऊद आलम ने 79,909 वोटों के साथ जीत दर्ज की थी। उनके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी गोपाल कुमार अग्रवाल (निर्दलीय) को 56,022 वोट मिले थे। सऊद आलम ने 23,887 वोटों के अंतर से यह सीट जीतकर RJD को सीमांचल में मजबूती दी थी। JDU के नौशाद आलम तीसरे नंबर पर रहे थे, जबकि AIMIM के उम्मीदवार महबूब आलम ने भी अच्छा प्रदर्शन किया था।
10 उम्मीदवारों के बीच था कांटे का मुकाबला
2020 में मैदान में कुल 10 उम्मीदवार थे, जिनमें प्रमुख नाम थे
सऊद आलम (RJD) – विजेता
गोपाल कुमार अग्रवाल (निर्दलीय)
नौशाद आलम (JDU)
महबूब आलम (AIMIM)
मो. कलीमउद्दीन (LJP)
देवव्रत कुमार गणेश (जन अधिकार पार्टी)
शाकिर आलम, मो. सफीर आलम (निर्दलीय)
शाहनवाज (राष्ट्रीय सेक्युलर मजलिस पार्टी)
नवीन कुमार मल्लाह (शिवसेना)
मतदाताओं का उत्साह भी रहा जोरदार
2020 में ठाकुरगंज सीट पर कुल 2,91,257 पंजीकृत मतदाता थे। 68.3% वोटिंग हुई, जिसमें से 1,89,652 वोट EVM से डाले गए और बाकी पोस्टल बैलेट से डाले गए थे।
ठाकुरगंज सीट का सियासी इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है।
वर्ष विजेता पार्टी
1952 अनंत कांत बसु- कांग्रेस
1967-1972 मोहम्मद हुसैन आजाद- कांग्रेस
1977 मोहम्मद सुलेमान- जनता दल
1980, 1985 मोहम्मद हुसैन आजाद- कांग्रेस
1990 मोहम्मद सुलेमान- जनता दल
1995 सिकंदर सिंह- BJP
2000, 2005 मोहम्मद जावेद- कांग्रेस
2005 (अक्टूबर) गोपाल अग्रवाल- समाजवादी पार्टी
2010 नौशाद आलम- LJP
2015 नौशाद आलम- JDU
2020 सऊद आलम- RJD
2025 में मुकाबला और दिलचस्प, नए चेहरे मैदान में!
2025 का चुनाव ठाकुरगंज में खासा रोमांचक होने जा रहा है। माना जा रहा है कि इस बार मुकाबला RJD, JDU, AIMIM, AAP, जन सुराज और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय से चतुष्कोणीय हो सकता है। गोपाल कुमार अग्रवाल फिर से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं, तो AIMIM और AAP भी मुस्लिम वोट बैंक को साधने की तैयारी में हैं।





