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Monday, March 2, 2026
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बिहार वोटर वेरिफिकेशन मामले में सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को करेगा सुनवाई, विपक्ष ने वैध नाम हटने की जताई आशंका

बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।

नई दिल्‍ली / रफ्तार डेस्‍क । बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने की आशंका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने इस मामले की त्वरित सुनवाई की मांग की, जिस पर शीर्ष अदालत ने सहमति जताते हुए कहा कि वह इस मुद्दे पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि इस वेरिफिकेशन अभियान के तहत लाखों वैध मतदाताओं के नाम मनमाने ढंग से सूची से हटाए जा सकते हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

’25 जुलाई तक राज्य भर में नाम हटाने की प्रक्रिया’

सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ताओं कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी, शादाब फरासत और गोपाल शंकरनारायणन ने मामले को तत्काल सुनवाई के लिए उठाया। उन्होंने अदालत को बताया कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वैध वोटरों, खासकर महिलाओं और गरीब तबके के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की आशंका है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने इस संशोधन प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उनका कहना है कि चुनाव आयोग की तय की गई समयसीमा बहुत कम है, और 25 जुलाई तक राज्य भर में बड़े पैमाने पर नाम हटाने की प्रक्रिया चल रही है।

‘इन्‍होंने की याचिका दायर’

इस मामले में याचिका दायर करने वालों में राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस, सांसद महुआ मोइत्रा, एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) शामिल हैं। याचिकाओं में इस वेरिफिकेशन प्रक्रिया को असंवैधानिक और जनविरोधी करार देते हुए कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

‘तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन की ये मांग’

तेजस्वी यादव के नेतृत्व में महागठबंधन ने वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन रोकने की मांग की है। बिहार में मतदाता सूची वेरिफिकेशन को लेकर महागठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग से मुलाकात कर इस प्रक्रिया को रोकने की अपील की है। इस मौके पर तेजस्वी यादव की अगुवाई में गठबंधन नेताओं ने एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें ग्रामीण और वंचित वर्ग के हित में अन्य प्रामाणिक दस्तावेजों को भी मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने के लिए स्वीकार करने की मांग की गई। ऐसा नहीं करने पर महागठबंधन ने सड़क पर उतरने और आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। आयोग से बातचीत के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा, “क्या चुनाव आयोग को केवल 11 दस्तावेजों को ही मान्यता देने का अधिकार है? संविधान के अनुच्छेद 326 में व्यस्क मताधिकार सुनिश्चित किया गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।”

चुनाव आयोग का दावा, वैध मतदाताओं के नाम नहीं हटाए जाएंगे

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के सत्यापन का काम संविधान के अनुच्छेद 326 और लोक प्रतिनिधित्व कानून के दायरे में ही किया जा रहा है। आयोग ने आश्वासन दिया है कि इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी वैध मतदाता का नाम सूची से हटाया नहीं जाएगा। इसका उद्देश्य केवल विदेशी घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं को पहचानकर वोटर लिस्ट से बाहर करना है।

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