नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के प्रशासनिक खेमे से जुड़ी एक बड़ी जानकारी सामने आ रही है। नौकरशाही के एक बड़ी अधिकारी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राज्य के शिक्षा विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी डॉक्टर एस सिद्धार्थ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने वॉलंट्री रिटायरमेंट (VRS) ली है।
30 नवम्बर 2025 को होने वाले थे रिटायर
अब ऐसे में माना जा रहा है कि वह आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में चुनावी मैदान में ताल ठोक सकते हैं। यह भी कहा जा रहा है कि सिद्धार्थ नवादा जिले की किसी सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। डॉक्टर सिद्धार्थ 30 नवम्बर 2025 तक रिटायर होने वाले थे, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने प्रशासनिक करियर छोड़ने का फैसला किया।
डॉक्टर सिद्धार्थ का प्रशासनिक करियर
डॉक्टर सिद्धार्थ के प्रशासनिक करियर की बात करें तो सिद्धार्थ ने अपने करियर में 29 वर्षों से अधिक की सेवा की है। इस दौरान उन्होंने मुज़फ्फरपुर, भोजपुर, औरंगाबाद और लोहरदगा ज़िलों के ज़िलाधिकारी के रूप में काम किया है।
भारत सरकार में भारी उद्योग मंत्रालय में निदेशक के रूप में भी उन्होंने काम किया। बिहार सरकार में उन्होंने सीएम के सचिव, शहरी विकास विभाग के सचिव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग, श्रम विभाग के सचिव और उद्योग विभाग के प्रधान सचिव जैसे अहम पदों पर काम किया।
डॉक्टर सिद्धार्थ ने कई अहम पदों पर काम किया
बिहार सरकार में डॉक्टर सिद्धार्थ ने कई महत्वपूर्ण पदों पर रहकर काम किया है। शहरी विकास विभाग में काम करने के दौरान डॉक्टर सिद्धार्थ ने बिहार अर्बन प्लानिंग एंड डिवेलपमेंट एक्ट 2014, इसके नियम और बिल्डिंग बायलॉज का ड्रॉफ्ट तैयार किया था। उन्होंने पटना मेट्रो की DPR और पटना मेट्रोपॉलिटन एरिया के मास्टर प्लान की शुरुआत भी की।
बिहार फाउंडेशन के CEO भी रह चुके डॉक्टर सिद्धार्थ
वे गृह विभाग, वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव, लोक शिकायत विभाग के सचिव, बिहार लोक प्रशासन और ग्रामीण विकास संस्थान के डीजी, बिहार प्रशासनिक सुधार मिशन के मिशन डायरेक्टर, गन्ना विभाग के प्रमुख सचिव, बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण के चेयरमैन और बिहार फाउंडेशन के सीईओ भी रहे।
डॉक्टर एस सिद्धार्थ सेंटर फॉर इकनॉमिक पॉलिसी एंड पब्लिक फाइनेंस के चेयरमैन व डायरेक्टर भी हैं। उनके पास कॉमर्स, इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट और ई-गवर्नेंस में भी एक्सपर्टीज है। वे भारत सरकार के कई PSUs के बोर्ड में डायरेक्टर भी रह चुके हैं।




