नई दिल्ली / रफ्तार डेस्क । बिहार में चुनावी सरगर्मी के बीच आरजेडी को उसके मजबूत गढ़ जहानाबाद में अंदरूनी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। यहां के मौजूदा विधायक सुदय यादव के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं और महागठबंधन समर्थकों ने मोर्चा खोल दिया है। रविवार को रतनी फरीदपुर प्रखंड के शकुराबाद स्थित एक निजी हॉल में महागठबंधन समर्थकों की एक अहम बैठक हुई, जिसमें बड़ी संख्या में राजद कार्यकर्ता, पंचायत प्रतिनिधि, स्थानीय नेता और आम नागरिक शामिल हुए। इस बैठक में सुदय यादव के खिलाफ असंतोष खुलकर सामने आया और कार्यकर्ताओं ने आगामी चुनाव में उनका टिकट काटने की मांग की।
विधायक के खिलाफ RJD कार्यकर्ता हुए लामबंद
जहानाबाद में आरजेडी विधायक सुदय यादव के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ता खुलकर मैदान में आ गए हैं। रतनी फरीदपुर के शकूराबाद में आयोजित एक बड़ी बैठक में कार्यकर्ताओं ने “सुदय हटाओ, जहानाबाद बचाओ” जैसे नारे लगाकर अपना गुस्सा जाहिर किया। बैठक में मौजूद नेताओं और स्थानीय लोगों ने विधायक पर कई गंभीर आरोप लगाए। पूर्व मंत्री मुद्रिका सिंह यादव के करीबी और कभी सुदय के समर्थक रहे कामेश्वर सिंह ने कहा कि वे अनुकंपा पर विधायक बने हैं, लेकिन दो बार विधायक रहने के बावजूद क्षेत्र में कोई ठोस विकास नहीं कराया। मुरहारा पथ जैसी अहम सड़क जो गया, जहानाबाद और अरवल को जोड़ती है, अब तक जर्जर है, मगर इस पर कोई काम नहीं हुआ।
वहीं, कार्यकर्ताओं ने अपना रोष व्यक्त किया है। साधु यादव, मीरा यादव, संजय राय और गजेन्द्र ने आरोप लगाया कि विधायक को जो 32 करोड़ रुपये का विकास फंड मिला था, उसका दुरुपयोग हुआ है। हर पंचायत को औसतन 70 से 75 लाख रुपये मिलना चाहिए था, लेकिन यह फंड केवल चहेतों में बांट दिया गया। कार्यकर्ताओं ने यह भी साफ किया कि यह विरोध सिर्फ पार्टी कार्यकर्ताओं का नहीं, बल्कि आम जनता का है। साथ ही उन्होंने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से सुदय यादव का टिकट काटने की मांग की है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी जगह किसी योग्य व जमीनी कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया जाए।
अंदरूनी कलह से बिगड़ सकता है चुनावी समीकरण
स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मानना है कि यदि पार्टी किसी ईमानदार और जमीनी नेता को टिकट देती है, चाहे वह किसी भी जाति या समुदाय से हो, तो जहानाबाद सीट पर आरजेडी की जीत भारी अंतर से सुनिश्चित है। यह सीट वर्षों से पार्टी का मजबूत आधार रही है और लगातार जीत दर्ज करती आई है। लेकिन जिस तरह से चुनाव से ठीक पहले अंदरूनी विरोध ने तेजी पकड़ी है, उससे साफ है कि यह कलह पार्टी को बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है। यदि नेतृत्व ने समय रहते इस असंतोष को शांत नहीं किया, तो इसका सीधा असर महागठबंधन की चुनावी रणनीति और नतीजों पर पड़ सकता है।




