नई दिल्ली, रफ्तार डेस्क । बिहार की सियासत इस वक्त उस मोड़ पर खड़ी है, जहां हर कदम नपे-तुले ढंग से रखा जा रहा है। मतदान पूरा हो चुका है, लेकिन असली मुकाबला अब शुरू हुआ है, जिसे आप नतीजों के इंतजार के रूप में देख सकते हैं । राजनीतिक तापमान बढ़ चुका है, दलों के दफ्तरों में बेचैनी साफ दिख रही है, और जनता की उंगलियों से निकला “मत” अब भाग्य रेखा तय करने को तैयार है।
दरअसल, यहां 2025 के विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले राजनीतिक माहौल बिजली की तरह तना हुआ है। वहीं, महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव की बढ़ती सक्रियता ने इस चुनावी सन्नाटे के बीच नई हलचल पैदा कर दी है।
तेजस्वी की रणनीति में सख्ती और सजगता दिखी
तेजस्वी यादव ने मतदान के बाद भी चुनावी मोर्चे को ठंडा नहीं पड़ने दिया है। बुधवार को उन्होंने सुबह से लेकर देर रात तक आरजेडी के 143 उम्मीदवारों से लगातार संपर्क बनाए रखा। फोन कॉल और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने प्रत्याशियों से मतगणना की तैयारी पर चर्चा की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी ने हर प्रत्याशी को साफ निर्देश दिए कि काउंटिंग के दिन किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए और हर पोलिंग एजेंट को अपनी जिम्मेदारी पूरी मुस्तैदी से निभानी होगी।
तेजस्वी यादव की सख्त हिदायत
तेजस्वी ने यह भी कहा कि प्रत्येक उम्मीदवार और एजेंट फॉर्म 17सी का मिलान अवश्य करें, ईवीएम की सील की जांच खुद करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना पार्टी नेतृत्व को दें। उन्होंने सख्त हिदायत दी कि मतगणना पूरी होने से पहले कोई भी काउंटिंग सेंटर न छोड़े। इस निर्देश ने आरजेडी कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भर दी है। पार्टी खेमे में इस बात को लेकर आत्मविश्वास है कि तेजस्वी की निगरानी और नेतृत्व में कोई भी काउंटिंग डे ब्लंडर नहीं होगा।
चुनावी सतर्कता पर फोकस
तेजस्वी यादव की रणनीति का सबसे अहम हिस्सा जो अब दिखाई पड़ता है, वह है चुनावी सतर्कता। उन्होंने अपने उम्मीदवारों को आगाह किया कि मतगणना के दौरान सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग या गिनती की गति धीमी कराने की कोशिशें हो सकती हैं। इस चेतावनी को राजनीतिक गलियारों में गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने कहा, “पोलिंग एजेंट को घबराना नहीं है, मुस्तैद रहना है। किसी भी अनियमितता या दबाव की स्थिति में तुरंत रिपोर्ट करें।” तेजस्वी की इस चेतावनी से साफ है कि वह नतीजों से पहले प्रशासनिक स्तर पर किसी संभावित खेल को लेकर सतर्क हैं।
नतीजों से पहले बढ़ा सस्पेंस
गौरतलब है कि बिहार में दो चरणों छह और 11 नवंबर को हुए मतदान के बाद अब पूरा राज्य 14 नवंबर का इंतजार कर रहा है, जब सुबह आठ बजे से ईवीएम की सील टूटेगी और जनता का फैसला सामने आएगा। राजनीतिक दलों के दफ्तरों में बैठकों का दौर तेज है, और हर संभावित रुझान पर चर्चा जोरों पर है। आरजेडी और महागठबंधन के खेमे में आत्मविश्वास का माहौल है। वहीं, एनडीए और जेडीयू की ओर से भी अंदरखाने रणनीतिक बैठकें जारी हैं।
सूत्रों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जेडीयू ने भी अपने जिलों के पर्यवेक्षकों को मतगणना केंद्रों पर निगरानी के निर्देश दिए हैं। लेकिन फिलहाल सियासी चर्चा का केंद्र बने हुए हैं तेजस्वी यादव जोकि यहां पर गठबंधन के चेहरे हैं। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा नेतृत्व के लिए यह चुनाव उनकी राजनीतिक साख का सवाल है।
एनडीए का प्रयास यह साबित करने का होगा कि बिहार की जनता अब भी स्थिर शासन के पक्ष में है। ऐसे में मतगणना से पहले तेजस्वी का यह सियासी अलर्ट मोड विपक्ष के लिए एक मजबूत संदेश है कि वह आखिरी गेंद तक संघर्ष के लिए तैयार हैं।




