नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। बिहार विधानसभा चुनाव की सरगर्मी तेज होते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के लगातार दौरे शुरू कर दिए हैं. चंपारण के बाद अब उनकी नज़र मगध और मुंगेर प्रमंडल पर है, जहां बीजेपी का प्रदर्शन हमेशा कमजोर रहा है. मोदी विकास परियोजनाओं की सौगात देकर इस क्षेत्र में चुनावी माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
गया से बेगूसराय तक विकास का तोहफा
शुक्रवार को पीएम मोदी बिहार और पश्चिम बंगाल में करीब 18,200 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे. गया में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का तोहफा दो अमृत भारत ट्रेनों का शुभारंभ दिल्ली-गया और बिहार-झारखंड रूट पर पटना और बेगूसराय में भी जनसभा और उद्घाटन कार्यक्रम गया के मगध विश्वविद्यालय में मोदी की बड़ी रैली भी होगी, जिसे बीजेपी के चुनावी अभियान की शुरुआत माना जा रहा है।
बीजेपी का सबसे कमजोर गढ़: मगध
मगध प्रमंडल में कुल 26 विधानसभा सीटें आती हैं. यहां बीजेपी का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है, 2020 चुनाव 26 में से 20 सीट महागठबंधन के पास, एनडीए को सिर्फ 6 सीटें 2015 चुनाव 21 सीटें महागठबंधन ने जीतीं, एनडीए को केवल 5 सीटें 2010 चुनाव: जेडीयू-बीजेपी साथ में लड़ी, 26 में से 24 सीटें मिलीं यानी जब भी बीजेपी और जेडीयू साथ होते हैं तो परिणाम उनके पक्ष में जाता है, लेकिन अलग होने पर पार्टी का ग्राफ गिर जाता है।
मुंगेर में कांटे की टक्कर
मगध के साथ ही मुंगेर प्रमंडल भी बीजेपी के लिए अहम है. इस क्षेत्र में 22 विधानसभा सीटें आती हैं. 2020 चुनाव: एनडीए ने 13 सीटें जीतीं, महागठबंधन के खाते में 9 सीटें 2015 चुनाव महागठबंधन 19 सीटों पर जीता, एनडीए को सिर्फ 3 सीटें मिलीं 2010 चुनाव जेडीयू-बीजेपी साथ लड़ी तो एनडीए को 18 सीटें मिलीं, आरजेडी सिर्फ 4 सीट पर सिमटी इस इलाके में सवर्ण और यादव वोटर चुनावी समीकरण तय करते हैं. पीएम मोदी बेगूसराय में सिक्स लेन पुल का उद्घाटन करेंगे, जिसे मुंगेर बेल्ट को साधने की रणनीति माना जा रहा है। जब पीएम मोदी ‘मिशन मगध’ पर जुटे हैं, उसी समय राहुल गांधी और तेजस्वी यादव भी वोटर अधिकार यात्रा के जरिए विपक्ष का वोट बैंक मजबूत करने की कोशिश में लगे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में मगध और मुंगेर बेल्ट बिहार की सियासत का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बनने वाले हैं, मोदी का यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं का उद्घाटन नहीं, बल्कि बिहार चुनाव से पहले मगध-मुंगेर की 48 सीटों पर सेंध लगाने की बड़ी राजनीतिक रणनीति भी है।





