नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की पत्नी ज्योति सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। अपने पति से विवाद के बीच ज्योति सिंह ने अब राजनीति में कदम रख दिया है और कहा है कि वह किसी पार्टी के सहारे नहीं, बल्कि जनता के भरोसे मैदान में उतरेंगी।
पार्टी से नहीं बनी बात, अब लेंगी निर्दलीय रास्ता
पिछले कुछ हफ्तों से ज्योति सिंह के नाम को लेकर सियासी हलचल तेज थी। पहले उन्होंने जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर (PK) से मुलाकात की थी। उस समय यह कयास लगाए जा रहे थे कि ज्योति सिंह जन सुराज के टिकट पर चुनाव लड़ सकती हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा उन्होंने तेजस्वी यादव की पार्टी आरजेडी (RJD) के नेताओं से भी मुलाकात की थी, लेकिन वहां भी बात नहीं बनी। अब ज्योति सिंह ने खुद ही साफ कर दिया है कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में काराकाट से चुनाव लड़ेंगी।
काराकाट में पहले से चल रहा जनसंपर्क अभियान
ज्योति सिंह ने अगस्त 2025 में काराकाट, नबीनगर और डिहरी जैसे इलाकों में जनसंपर्क अभियान चलाया था। उन्होंने कई गांवों में जाकर लोगों से बातचीत की और जनता की समस्याओं को सुना। यह इलाका राजपूत बहुल क्षेत्र माना जाता है, और राजनीतिक रूप से काफी सक्रिय है। ज्योति सिंह ने कहा है कि वे “जनता की आवाज” बनकर चुनाव मैदान में उतर रही हैं।
प्रशांत किशोर से मुलाकात पर क्या कहा था ज्योति सिंह ने?
जन सुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर से मुलाकात के बाद ज्योति सिंह ने कहा था कि वह अपने भाई के पास न्याय मांगने आई हैं। उन्होंने पति पवन सिंह से हुए विवाद का जिक्र करते हुए कहा था कि वे बस इतना चाहती हैं कि “मेरे साथ जो हुआ, वह किसी और महिला के साथ न हो। वहीं, प्रशांत किशोर ने कहा था कि उनकी ज्योति सिंह से कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई। उन्होंने सिर्फ यह भरोसा दिलाया था कि अगर कोई उन्हें धमकाता है या दबाव बनाता है तो वह मदद करेंगे। पवन सिंह और ज्योति सिंह के बीच पिछले कुछ महीनों से विवाद और दूरी की खबरें सुर्खियों में हैं। ऐसे में अब ज्योति सिंह का राजनीति में उतरना चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ज्योति सिंह के चुनाव मैदान में उतरने से काराकाट सीट पर मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। ज्योति सिंह के निर्दलीय चुनाव लड़ने के ऐलान ने बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता का रुख उनके प्रति कैसा रहता है और क्या वह काराकाट की सियासत में कोई नया इतिहास रच पाती हैं।




