back to top
25.1 C
New Delhi
Monday, March 2, 2026
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img

आगामी बिहार चुनाव से पहले पप्पू यादव ने खेला बड़ा दांव, 9 जुलाई को बिहार बंद का किया आव्हान

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 से पहले चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन मतदाता सूची को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। पप्पू यादव ने 9 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान किया है।

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले आयोग द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन मतदाता सूची के पुनरावलोकन को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। जहां पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस प्रक्रिया के विरोध में 9 जुलाई 2025 को बिहार बंद और चुनाव आयोग के कार्यालय का घेराव का ऐलान किया है। इसके साथ ही वह इस मामले में कानूनी कार्रवाई के लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की प्लान बना रहे है। 

बिहार में चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर पप्पू यादव ने 9 जुलाई को बिहार बंद का ऐलान किया है। विपक्षी दल इसे अल्पसंख्यकों और पिछड़ों को वोटर सूची से हटाने की साजिश बता रहे हैं। रिर्पोट्स की माने तो अपने इस कदम के जरिए पप्पू यादव ने बिहार चुनावों से ऐन पहले ‘मास्टरस्ट्रोक’ खेलने की कोशिश की है।

क्यों शुरू हुआ यह पूरा विवाद?


चुनाव आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश दिया है जो 25 जून से 25 जुलाई 2025 तक चलेगा। इस प्रक्रिया के तहत बिहार के लगभग आठ करोड़ मतदाताओं को अपनी नागरिकता और पात्रता साबित करने के लिए दस्तावेज जमा करने होंगे। जैसे जन्म प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, मूल निवास प्रमाण पत्र या 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई सरकारी दस्तावेज जमा करने होंगे। जिसमें कांग्रेस, आरजेडी और एआईआईएम समेत कई विपक्षी दलों का दावा है कि, यह प्रक्रिया जिसका उद्देश्य गरीब, दलित, पिछड़े, और अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं को सूची से हटाना है। इसपर तेजस्वी यादव ने इसे ‘लोकतंत्र पर हमला’ करार दिया है।

पप्पू यादव ने इस मुद्दे पर क्या कहा?


इस पूरे मुद्दे पर पप्पू यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, हम चुनाव आयोग के कार्यालय को घेरने के लिए 9 जुलाई को पूरा बिहार बंद करेंगे। जिसके लिए आज हम हाई कोर्ट जा रहे हैं, हम इस पूरी लड़ाई में कांग्रेस के साथ हैं। एनडीए सरकार हमारे लोकतांत्रिक अधिकार छीन रही है। वोट देना हर आदमी का मौलिक अधिकार है। यह सरकार चुनाव आयोग के माध्यम से गरीबी दलित और अति पिछड़ा के वोट देने के अधिकार को छीनना चाहती है। चुनाव आयोग तो RSS का कार्यालय बन चुका है। जहां आरएसएस के कहने पर ही वोटर लिस्ट तैयार होती है। 

पप्पू यादव ने क्यों ठोकी ताल?


बता दें, पप्पू यादव बिहार की राजनीति में एक मुखर नेता के रूप में जाने जाते है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि, जहां इस मुद्दे को उठाकर कई स्तरों पर लाभ उठाने की कोशिश कर सकते हैं। इस आंदोलन के जरिए बिहार की जनता, खासकर युवाओं, दलितों, और पिछड़े वर्गों के बीच अपनी लोकप्रियता प्रासंगिकता बढ़ाने की कोशिश में लगे पप्पू यादव पहले भी ज्वलंत मुद्दों को उठा चुके हैं और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि उन्हें इसका लाभ लोकसभा चुनावों में मिला था, जब वह निर्दलीय लड़कर भी जीत गए थे।

Advertisementspot_img

Also Read:

असम चुनाव के लिए कांग्रेस ने 30 सीटों पर तय किए उम्मीदवार, गौरव गोगोई जोरहाट से लड़ सकते हैं चुनाव

नई दिल्ली,रफ्तार डेस्क। असम विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) की बैठक...
spot_img

Latest Stories

Amitabh Bachchan ने सोशल मीडिया पर किया ऐसा ट्वीट, फैंस में मचा तहलका

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। बॉलीवुड के मेगास्टार अमिताभ बच्चन सोशल...

बंगाल से राज्यसभा की दौड़ में नई एंट्री, ममता बनर्जी ने किया नॉमिनेट, आखिर कौन हैं कोयल मल्लिक?

नई दिल्‍ली/रफ्तार डेस्‍क । पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की...

The Kerala Story 2 Day 1 Collection: कंट्रोवर्सी के बाद भी बॉक्स ऑफिस पर मजबूत ओपनिंग

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। कोर्ट केस और सियासी विवादों के...

तेहरान समेत ईरान के कई इलाकों में विस्फोट, इजरायल की बड़ी सैन्य कार्रवाई का दावा

नई दिल्ली/रफ्तार डेस्क। अंतरराष्ट्रीय माहौल आज 28 फरवरी 2026...